स्थान- जिला महिला अस्पताल
समय - 1.15
जिला महिला अस्पताल में कोरोना को लेकर कोई फिक्रमंद नहीं है। अमर उजाला टीम ने अस्पताल के अंदर आने-जाने वाले मरीजों के नजारे कैद किए तो सब आराम से कामकाज निपटाते हुए दिखाई दिए। अस्पताल के अंदर कुछ महिलाएं एक साथ बैठकर आपस में बातचीत कर रही थी, न तो वह मास्क लगाए थी, न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रही थी।
स्थान- लालबाग बाजार
समय- 2.40
होली का समय चल रहा है। लालबाग बाजार में भीड़ होना स्वाभाविक है। बाजार में दुकानों पर भीड़ दिखाई दी। किसी भी दुकान पर सैनिटाइजर की व्यवस्था नहीं थी। लोग आपस में एक-दूसरे से सटकर बैठे हुए खरीदारी कर रहे थे। जब वह दुकान से बाहर निकले तो सड़क पर आराम से भीड़ की धक्के खाते हुए चल रहे थे। इनको देखकर कहीं पर भी ऐसा नहीं लगा कि यह लोग कोरोना को लेकर चिंतित हैं।
स्थान- रोडवेज बस अड्डा
समय - 2.25
रोडवेज बस अड्डे पर दोपहर में काफी भीड़ दिखाई दी। बसों से लेकर वेटिंग रूम तक मुसाफिर ही मुसाफिर दिखाई दे रहे थे। बसों के अंदर लोग एक-दूसरे से सटकर बैठे हुए थे। जब वेटिंग रूम देखा तो यहां पर मुसाफिर बिना मास्क लगाए आपस में बातचीत कर रहे थे। रोडवेज पर कोरोना को लेकर कोई भी एहतियात नहीं दिखाई दी। न ही इससे बचाव के लिए कोई जागरूकता कार्यक्रम चलता हुआ दिखाई दिया।
सीतापुर। गैर राज्यों में बढ़ते कोरोना के मामलों ने एक बार फिर से खतरे की घंटी बजा दी है, लेकिन इस बार जिले की सरकारी मशीनरी के सामने दोहरी समस्या है। एक तो गैर राज्यों से आने वाले यात्रियों को स्वास्थ्य महकमा ट्रेेस नहीं कर पा रहा है, दूसरा पिछले तीन दिनों से कोरोना संक्रमित मिल रहे मरीजों के पॉजिटिव होने की हिस्ट्री जिम्मेदार नहीं खंगाल पा रहे हैं।
जिन राज्यों में अधिक मामले आ रहे है, वहां से लोग सीतापुर से भी आते-जाते रहते हैं। लेकिन इनकी पहचान कैसे हो, इसकी पुख्ता व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। वजह, आवागमन चालू है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर खुद ये बात स्वीकार कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान से जिले में आने वाले लोगों पर नजर रखने के आदेश शासन ने दिए हैं।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग रोडवेज और रेल विभाग के संपर्क में है, लेकिन लगातार संपर्क में रहने के बाद पिछले 10 दिनों से इन राज्यों से कितने लोग जिले में आए, इसकी जानकारी दोनों विभागों को नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की माने तो इसके पीछे वजह है कि इन राज्यों से जिले के लिए कोई भी सीधी बस या रेल सेवा नहीं है।
ऐसे में जब ये लोग उन प्रदेशों से जिले में आ रहे हैं तो रास्ते में वाहन बदल लेते हैं, जिससे जिले में आने पर पता नहीं चल पा रहा है कि वह लोग कहां से आ रहे हैं। मसलन, अगर कोई महाराष्ट्र से आकर लखनऊ आया। उसके बाद वह सीतापुर चला आया। ऐसे में उसकी कैसे पहचान हो पाएगी। यही हाल रेलवे प्रशासन का भी है।
इसी वजह से आने जाने वालों की पहचान नहीं हो पा रही है। गांवों में आशा कार्यकर्ता, एएनएम को बाहर से गांव आने वालों पर नजर रखने की बात कही गई है, लेकिन इससे भी जानकारी नहीं हो पा रही है।
होली के लिए संभलकर करें खरीदारी
कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। होली को लेकर लोग खरीदारी में जुटे हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है। कारण यह है बाजारों में जमकर भीड़ भाड़ हो रही है। दुकानदार भी बिक्री के चक्कर में प्रोटोकॉल भूल रहे है। ग्राहक भी कोरोना को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। ग्राहक व दुकानदार दोनों की लापरवाही कोरोना प्रसार में अहम भूमिका निभा सकती है। ऐसे में खरीदारी करें, लेकिन प्रोटोकॉल का भी पूरी तरह से पालन करें।
लॉकडाउन में पहचान थी आसान
पिछले वर्ष मार्च माह के बाद लॉकडाउन लग गया था। उसके बाद कुछ चुनिंदा बस व ट्रेनें ही चल रही थी। जिसके कारण बाहर से आने जाने वालों की पहचान बहुत ही आसान थी। उनको रेलवे व रोड़वेज पर ही चिह्नित कर लिया जाता था। अब जब सब कुछ सामान्य हो गया है। कही पर भी कोई प्रतिबंध नहीं बचा है तो बाहर से आने जाने वालों की पहचान मुश्किल हो रही है।
एक और मरीज मिला कोरोना संक्रमित
पिछले 10 दिन के बाद शनिवार को जिले में दो पॉजिटिव केस मिले थे। उसके बाद रविवार को फिर से एक केस पॉजिटिव आया है। सोमवार को फिर से दो केस आने से आगे भी मरीज बढ़ने की आशंका है। जिले में सात एक्टिव केस हैं, जिसमे दो मरीज होम क्वारंटीन है। तीन लखनऊ में भर्ती है। दो मरीज के भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। 83 लोगों की मौत हो चुकी है।
जिले में कोरोना के मामले तीन दिन से आ रहे हैं। रेलवे व रोडवेज प्रशासन को अलर्ट किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग इनके संपर्क में है। लेकिन कितने लोग आ रहे हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं हो पा रही है। गैर राज्यों से जिले के लिए कोई सीधी बस सेवा नहीं है। ऐसे में लोग रास्ते में वाहन बदलकर दूसरे डिपो की बसों से आते हैं, उन्हें ट्रेस करने में परेशानी हो रही है।
डॉ. पीके सिंह, एसीएमओ