सीतापुर के तहसील परिसर में लगी रस्सी उठाकर प्रवेश करता कर्मी व कही भी कोविड हेल्प डेस्क नहीं दिख?
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सीतापुर। जिले में एक हजार से अधिक कोरोना मरीज चिह्नित हो चुके हैं। फिर भी मुख्यालय पर बनी कोविड हेल्प डेस्क पर शासन के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। यहां जिम्मेदार मनमानी कर रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में आने वाले सभी लोगों की जांच नहीं की जा रही है। सैनिटाइजर की बोतल भी खाली है।
विकास भवन में दो दर्जन से अधिक विभागों के दफ्तर हैं। यहां जिला पंचायत राज अधिकारी एवं उनके अधीन काम करने वाले आधा दर्जन कर्मचारी सहित अन्य विभागों के कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं। यहां अंदर जाने वाले सभी व्यक्तियों की जांच के लिए कोविड हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। इसके लिए विकास भवन में इंट्री करने वाले सभी स्थलों को बंद कर दिया गया है।
केवल हेल्प डेस्क प्रवेश द्वार से ही जाने की अनुमति है। सोमवार को यहां तैनात कर्मचारियों की लापरवाही उजागर हुई। लोगों के हाथ सैनिटाइज करने के लिए सैनिटाइजर बोतल में मौजूद नहीं था। कैमरे को देखकर कर्मी हड़बड़ाहट में दिखे। इसके बाद सैनिटाइजर की व्यवस्था की। कई लोग बिना जांच कराए ही अंदर चले गए। दोपहर एक बजे तक डेढ़ सौ लोगों की जांच हो चुकी थी।
डीएम दफ्तर म़ें जाने के लिए जिला पंचायत वाले मुख्य गेट पर कोविड हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। सोमवार को यहां काम के लिए आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का नाम व पता रजिस्टर पर अंकित किया जाता है। साथ ही वह किस काम के लिए आया है, उसका मोबाइल नंबर भी दर्ज करने के बाद तापमान की जांच एवं हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा था। दोपहर 12 बजे इसके लिए लंबी लाइन लगी थी। सुबह दफ्तर आने के समय यहां भी लापरवाही दिखी। कई आफिस के कर्मचारियों को बिना जांच के ही अंदर जाने दिया गया।
बाहरी व्यक्तियों को ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड के जवान रोक कर जांच करा रहे थे, वहीं दफ्तर के कुछ कर्मचारियों को बिना रोके जाने दिया। उनकी बाइक को नहीं रोका। इस प्रकार कोविड हेल्प डेस्क पर शासन के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। तहसील सदर में कोविड हेल्प डेस्क के नाम पर रस्सी बंधी है। बिना किसी रोक टोक के लोग उसे लांध कर अंदर जाते दिखे। इससे कर्मचारियों को संक्रमण का खतरा है।
सीतापुर के विकास भवन में कुर्सी पर बैठे कर स्कैंनिंग करता कर्मचारी।- फोटो : SITAPUR