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Sitapur News: तमंचा रखने वाला सिपाही भेजा गया जेल

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सीतापुर। शहर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत फायरिंग बट से वापस आते समय तमंचे की गोली से घायल सिपाही को पुलिस ने जेल भेज दिया है। सिपाही को अवैध शस्त्र रखने और उच्चाधिकारियों को घटना के संबंध में गुमराह करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पीएसी मध्य जोन की आईजी ने पुलिस शूटिंग टीम के सात सदस्यों पर भी कार्रवाई की है। इन सभी को प्रशिक्षक और सहायक प्रशिक्षक के पद से हटा दिया गया है।
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37वीं वाहनी कानपुर में तैनात जौनपुर निवासी अनूप यादव जिले में पीएसी की फायरिंग बट में प्रशिक्षण लेने के लिए आया था। 22 दिसंबर की रात वह गोली लगने से जख्मी होकर अस्पताल पहुंचा था। विभागीय अधिकारियों को गुमराह करते हुए दो अज्ञात लोगों द्वारा गोली मारने की बात कही थी। विवेचना में पता चला था कि वह खुद ही कमर में तमंचा लगाए था। लघुशंका के दौरान तमंचा चलने से घायल हो गया था।
एसपी घुले सुशील चंद्र भान के निर्देश पर शहर कोतवाली के उपनिरीक्षक अंसार हुसैन रिजवी ने अनूप यादव के खिलाफ अवैध शस्त्र अधिनियम का मामला दर्ज किया था। अस्पताल से छुट्टी होने पर अनूप यादव को शहर कोतवाली पुलिस ने बीती 25 दिसंबर को जेल भेज दिया। पूरे मामले को मीडिया से छिपाए रखा। इसी प्रकरण में शुक्रवार को भी एक कार्रवाई हुई है।
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उत्तर प्रदेश पुलिस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड लखनऊ की सचिव और पीएसी मध्य जोन की आईजी अपर्णा कुमार ने 27वीं वाहिनी पीएसी सीतापुर में प्रशिक्षक के पद पर तैनात निरीक्षक रंजना गुप्ता सहायक प्रशिक्षक अमृता पांडेय और रूबल यादव, पुलिस शूटिंग टीम के सदस्य रामलोटन, दुर्गेश चंद्र यादव, अंकित सिंह और अनूप चंद्र यादव को शूटिंग टीम से हटा दिया है। इनमें रंजना गुप्ता को आगरा, अमृता पांडेय को जालौन, रूबल यादव को 35वीं वाहिनी लखनऊ, दुर्गेश चंद्र यादव को उनकी मूल तैनाती पर वापस भेजा गया है।
इसी तरह अनूप चंद्र यादव, अंकित सिंह व रामलोटन को भी संबंधित वाहिनी में वापस भेजने के आदेश दिए गए हैं। पूरी कार्रवाई 27वीं वाहिनी पीएसी सीतापुर के सहायक सेना नायक प्रकाश दुबे की आख्या पर की गई है। मामले की प्रारंभिक जांच उपसेना नायक जोेगेंदर लाल को सौंपी गई है।
जिसने दी सही जानकारी, उसी पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पुलिस शूटिंग टीम की प्रशिक्षक रंजना गुप्ता ने ही घटना के बाद पूरे प्रकरण की जानकारी शहर कोतवाल टीपी सिंह को दी थी। खुद भी जिला अस्पताल पहुंच गई थी। जिला अस्पताल से सिपाही को लखनऊ रेफर कराने और उसका इलाज कराने में भी रंजना गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बावजूद इसके रंजना गुप्ता को ही उच्चाधिकारियों को सूचना समय न देने समेत अन्य आरोपों में प्रशिक्षक पद से मुक्त कर दिया गया।
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