बाढ़ग्रस्त इलाके में घाघरा के जलस्तर में तेजी से इजाफा हो रहा है। सोमवार रात से बाढ़ पीड़ित गांवों में पानी बढ़ रहा है। इससे उन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दुर्गा पुरवा व कोनी गांव में हालात काफी खराब है। इन दोनों गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।
इन्हीं गांवों में निर्मलपुरवा के कटान पीड़ित भी पड़े हैं। उनका घर व गांव तो चला गया, लेकिन मुसीबत अब भी पीछा नहीं छोड़ रही है। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे जलस्तर में इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
घाघरा का कहर इन दिनों दुर्गापुरवा के निकट सड़क पर टूट रहा है। सड़क के नाम पर अब सिर्फ पगडड़ी बची है। इस पगडंडी के खत्म होते ही बाढ़ व कटान की मुसीबत दुर्गा पुरवा गांव पर टूटेगी। यह ऐसा गांव है, जो निर्मल पुरवा के कटान पीड़ितों की शरण स्थली बना हुआ है। सड़क कट जाने की वजह से यह अलग थलग पड़ गया है।
इस सड़क को दुरुस्त करने में जिम्मेदारों के हाथ पांव फूल रहे हैं। क्षेत्र के गोड़ियन पुरवा, राम लाल पुरवा, जैतहिया, सोमवारी पुरवा, लोध पुरवा, गार्गी पुरवा, जिन्ना पुरवा, आदि 61 गांवों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। गांवों में दो फीट से लेकर तीन फीट तक पानी बढ़ा है, जिससे यहां नाव चल रही हैं। पचीसा टापू पर भी बाढ़ का संकट मंडरा रहा है।
जल स्तर बढ़ने से टापू का आधा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। हालांकि यहां पर बसे परिवारों ने ऊंचे स्थान पर डेरा डाल रखा है। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त गांवों में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में करीब 48 गांव बाढ़ की जद में हैं।
हाल ही में पानी कम पड़ा था, तब लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन सोमवार रात से एक बार फिर से बाढ़ग्रस्त गांवों में जलस्तर बढ़ गया है। अंगरौरा, कनरखी, दुबे पुरवा, पंडित पुरवा, नया पुरवा आदि गांवों के बाढ़ पीड़ित संशय में हैं, उनके सामने समस्या ये है कि वे घर छोड़कर कहां जाएं। अंगरौरा के निकट बांध पर सैकड़ों परिवारों ने डेरा डाल रखा है। इस बार
ये बांध भी महफूज नजर नहीं आ रहा है। जिले में बाढ़ की चपेट में 108 गांव हैं। इन गांवों में अब राशन का संकट गहरा रहा है। प्रशासन की मदद न पहुंचने से बाढ़ पीड़ित भूख से परेशान हैं। उधर, घाघरा व शारदा बैराजों से 247053 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसकी वजह से जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
बीमारी पसार रही है पांव
बाढ़ग्रस्त इलाके में बीमारियां पांव पसारने लगी हैं। अधिकतर लोगों के पैरों में जख्म हो रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि पैर अधिक समय तक बाढ़ के पानी में भीगने की वजह से ये बीमारी फैल रही हैं। वहीं बुखार, उल्टी व दस्त से भी तमाम परिवार पीड़ित हैं। पीड़ितों का कहना है कि घर के राशन भर का तो रुपया नहीं है।
इलाज के लिए रुपये कहां से लाएं। इलाज से पहले बीमार व्यक्ति को बाढ़ के पानी से बाहर निकलने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। नाव वालों को रुपये देने के साथ खुशामद भी करनी पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गिने चुने स्थानों पर ही पहुंच सकी है। जिसकी वजह से अधिकांश पीड़ितों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।