बसपा भले सीतापुर संसदीय सीट पर 2009 के बाद से जीत दर्ज नहीं कर सकी हो, लेकिन परंपरागत वोट बैंक पर आज भी पार्टी की पकड़ बनी हुई है। रविवार को 41 डिग्री तापमान के बीच चुनावी जनसभा में कार्यकर्ताओं व कैडर का जोश देखकर बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद भी उत्साहित नजर आए।
उन्होंने भीषण गर्मी में भारी संख्या में पहुंचे लोगों का आभार व्यक्त किया। पहली बार मायावती के बगैर होने वाली जनसभा में तपिश के बीच डटी भीड़ ने बता दिया कि बसपा ने अपनी जमीनी पकड़ को कमजोर नहीं होने दिया है। इससे विरोधियों की चिंता बढ़ना लाजिमी है।
सीतापुर संसदीय सीट की बात करें तो डेढ़ दशक तक इस पर बसपा का कब्जा रहा है। बसपा ने यह सीट 1999 में भाजपा से छीनी थी। राजेश वर्मा ने 2,11,120 वोट हासिल करते हुए पहली बार हाथी को सीतापुर से दिल्ली पहुंचाया था। 2004 के चुनाव में भी राजेश वर्मा ने सीट पर कब्जा बरकरार रखा।
2009 के चुनाव में बसपा ने यहां से कैसरजहां पर दांव लगाया। कैसरजहां ने 2,41,106 मत हासिल कर सीट पर बसपा का कब्जा बरकरार रखा। 2014 में कैसरजहां 3,66,519 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। 2019 में बसपा-सपा गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर नकुल दुबे मैदान में उतरे। वह 4,13,695 मतों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। पिछले लगातार दो चुनाव में बसपा भले ही जीत न सकी हो, मगर दूसरे नंबर पर रहकर भाजपा को टक्कर देती नजर आई।
इस बार बसपा अकेले चुनाव लड़ रही है। बसपा ने पूर्व विधायक महेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया है। रविवार को तपती दोपहरी में भी जनसभा में पहुंची भीड़ का जोश देखने लायक था। युवाओं के साथ ही बुजुर्ग, महिलाएं व युवतियां भी जनसभा में पहुंची थीं। आकाश के भाषण पर लोग उत्साहित होकर नारे लगाते हुए तालियां बजा रहे थे।
सर्वजन हिताय का कार्ड खेल गए आकाश
बसपा की चुनावी रैली में नेशनल कोऑर्डिनेटर सर्वजन हिताय का कार्ड खेल गए। उन्होंने कहा कि बसपा मुखिया सिर्फ बहुजन को नहीं बल्कि सर्व समाज को साथ में लेकर चलती है। उन्होंने मंच पर मौजूद ब्राह्मण, दलित, यादव, सिख व मुस्लिम समाज के लोगों का उदाहरण दिया। कहा कि बसपा हर बार अलग-अलग समाज से प्रत्याशी उतारती है। सीतापुर में पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम, ब्राह्मण के बाद अब यादव समाज से प्रत्याशी मैदान में हैं।