कुछ ही दिन बाद 2015 अलविदा कह देगा। लेकिन यह साल लोगों को याद रहेगा। इस बरस खाद्य पदार्थों से लेकर फल व रासायनिक खादों में बेतहाशा वृद्धि हुई। जहां पिछली दिसंबर की मुकाबलेे इस बार सब्जियों के दामों में दस से पंद्रह प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। वही रासायनिक खादों में 30 से 35 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वही फलों के दामों में पांच से दस प्रतिशत तक बढ़े। जिसका असर आम आदमी पर पड़ा।
थाली से सब्जियां गायब होने लगी। वही किसान महंगाई के कारण कराह रहे। जहां फल आम आदमी से दूर होते जा रहे है। इसके अलावा दालों के दाम आसमान छूने लगे। पिछले बरस 80 रुपये किलो बिकने वाली अरहर की दाल 160 रुपये तक पहुंच गई है।
वहीं अन्य दालों के दामों में 40 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। आटा व चावल भी काफी महंगा हुआ। 15 रुपये किलो बिकने वाला आटा 22 रुपये तक पहुंच गया। वही चावल 25 से 35 रुपये तक आ गया है। इस महंगाई के कारण आम आदमी कराह रहा है। वही व्यापारी भी इससे अछूते नहीं है।
खाद्य पदार्थों के भाव (रुपये प्रति किलो में)
खाद्य पदार्थ पिछले दिसंबर आज का भाव
आटा 15 22
चावल 25 35
अरहर दाल 90 150
उर्दू 70 120
सेब 60 80
केला 20 30
अनार 40 60
डीएपी 1161 1191
यूरिया 434 448
आलू 5 10
टमाटर 8 12
प्याज 15 20
बिगड़ा रसोई का बजट
महंगी दाल के कारण सब्जियां प्रयोग करने लगी हूं। पिछले बरस की तुलना में इस बार दालों के रेट में काफी वृद्वि हुई है। जिसके कारण रसोई का बजट बिगड़ गया है। -विनीता सिंह, गृहणी
नहीं रहा काबू
आटा चावल व फलों के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है। हालात यह हो गए कि आम आदमी इससे दूर होता जा रहा है। सरकारों को इन पर नियंत्रण नहीं रह गया है। अमीता, गृहणी
महंगा हुआ उत्पादन
रासायनिक उर्वरकों के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इससे उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है। उर्वरक महंगे होने के कारण बहुत सावधानी से इनका प्रयोग करते है।-भानु प्रताप सिंह, किसान
बढ़े चार्ज ने बढ़ाई मुश्किल
एक तो सिंचाई महंगी होती जा रही है। वही लेबल चार्ज बढ़ता जा रहा है। इस दौरान दाम बढने से आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो गई है। -अनिल बाजपेई, किसान
कम हुई बिक्री
व्यापारियों पर भी महंगाई का असर पड़ा है। जहां दालों के दाम में बढ़ोत्तरी से ग्राहक कम खरीद रहे है। जिसके कारण बिक्री कम हुई है। मोहम्मद वसीम, व्यापारी
पांच के बजाए दो किलो खरीद रहे सब्जी
जहां पिछले बरस लोग पांच किलो सब्जी खरीदते थे। आज महंगाई के कारण वह सिर्फ दो किलो से ही काम चला रहे है। इसरार, व्यापारी