खरीद के पैसे मिलने का इंतजार
ब्लॉक हरगांव के प्राथमिक विद्यालय सेलूमऊ में 168 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें से 163 बच्चों का डेटा डीबीटी के तहत भेजा गया था। इनमें से महज 92 बच्चों के अभिभावकों के खाते में ही अब तक स्वेटर व जूता मोजा खरीद की धनराशि आई है जबकि 71 बच्चों के अभिभावक अभी तक यूूनीफॉर्म, स्वेटर व जूता-मोजा खरीदने के इंतजार में हैं।
50 फीसदी के खाते में नहीं पहुंचा कोई पैसा
ब्लॉक महमूदाबाद के प्राथमिक विद्यालय पैगम्बरपुर में कुल 375 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें से अभी तक केवल 164 बच्चों के अभिभावकों के खाते में ही स्कूली ड्रेस के साथ स्वेटर व जूता मोजा खरीदने की अनुदान राशि पहुंची है। दूसरी तरफ कंपोजिट विद्यालय लोधाशा में पंजीकृत 271 छात्रों में से 115 बच्चों के अभिभावकों के खाते में ही अनुदान राशि आने से बाकी बच्चे ठंड शुरू हो जाने के बाद भी स्वेटर व जूता मोजे के बिना हैं।
सीतापुर। नवंबर के दूसरे पखवाड़े में तेवर दिखाती ठंड अब बड़ों से लेकर बच्चों तक को कंपकंपाने लगी है। इस दौरान चल रही सर्द हवाओं से सुबह-शाम ही नहीं दिन में भी गर्म कपड़े पहनना शुरू हो गया है। ऐसे में जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब एक लाख बच्चे सुबह ठंड में बिना स्वेटर व जूता-मोजा के ही स्कूल जाने को विवश बने हैं।
विभाग अभी तक इन बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूूनीफॉर्म, स्वेटर व जूता-मोजा की रकम तक नहीं भेज पाया है। विभागीय जिम्मेदार इसके लिए कही बच्चों के आधारकार्ड न बने होने तो कहीं उनके अभिभावक का बैंक खाता उनके आधार से लिंक न होने की परेशानी बता रहे हैं।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 2365 प्राथमिक, 542 पूर्व माध्यमिक व 604 संविलयन विद्यालय हैं। इन 3511 विद्यालयों में 6 लाख 26 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बच्चों के लिए बैग, यूूनीफॉर्म, स्वेटर, जूता-मोजा, पेन, पेंसिल व रबड़ इत्यादि खरीदने के लिए सरकार 1200 रुपये की राशि सीधे अभिभावकों के खाते में भेजती है। ताकि अभिभावक स्वयं बेहतर गुणवत्ता की सामग्री खरीद सकें।
स्कूल खुलने के साढ़े सात माह बाद भी विभागीय स्तर से अभी तक शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की डेटा फीडिंग का काम पूरा नहीं कर सका है। बीते दो दिन पहले ही 24 हजार बच्चों का ब्यौरा विभाग को सत्यापन के लिए भेजा गया है।
ऐसे ही 28 हजार बच्चों का आधार कार्ड तक अभी नहीं बना है जबकि 31 हजार बच्चों से जुड़े डेटा में खामी मिली है। इस तरह जिले में परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे लगभग एक लाख छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में अभी तक स्कूल ड्रेस, स्वेटर जूता मोजा की खरीद का पैसा नहीं पहुंच सका है। ऐसे में स्वेटर व जूता मोजा न खरीद पाने वाले बच्चों को सुबह ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ रहा है।
अभिभावकों की लापरवाही भी भारी
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों का आधार कार्ड बनवाने, बैंक खाता खुलवाने और केवाईसी आदि की औपचारिकता पूरी करने में अधिकांश अभिभावक रुचि नहीं लेते हैं। शिक्षकों का कहना है कि कई बार कहने के बाद भी अभिभावक न तो बच्चे का आधार कार्ड बनवाते हैं और न ही अपने बैंक खाते को आधार से लिंकअप कराने की जानकारी ही विभाग को उपलब्ध कराते हैं। अभिभावक की यह लापरवाही भी बच्चों पर भारी पड़ रही है।
डीबीटी के लिए रोजाना बीईओ से अपडेट रिपोर्ट ली जा रही है। जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है। उन्हें बीआरसी के माध्यम से बनवाया जा रहा है। आधारकार्ड व बैंक एकाउंट में लिंक न होने के कारण आ रही दिक्कतों को भी डीएम के हस्तक्षेप बाद अब प्राथमिकता पर दूर कराया जा रहा है। जल्द ही बचे बच्चों के अभिभावकों के खाते में धनराशि भेज दी जाएगी।
अजीत कुमार, बीएसए