सीतापुर। बिसवां विकास खंड की दो ग्राम पंचायतों में गठित स्वयं सहायता समूहों की कृषि सखियों की ओर से खरीफ में इस बार मोटे अनाज की खेती की जाएगी। कृषि सखियों ने औषधीय खेती के साथ ही श्री अन्न की खेती की तैयारी शुरू की है। इसके लिए वह अच्छे देसी बीजों का चयन कर रही हैं। ताकि कम लागत से सेहत को दुरुस्त बनाने वाले श्री अन्न की बेहतर खेती हो सके।
बिसवां ब्लाक की ग्राम पंचायत भिनैनी के नारी सशक्तीकरण महिला स्वयं सहायता समूह की कृषि आजीविका सखी सीता देवी ने बताया कि वह इस बार बटाई पर खेत लेकर मोटे अनाज की खेती करेंगी। इसके तहत सांवा, कोदौ और बाजरा की पैदावार की जाएगी। इसके लिए देसी बीज की उपलब्धता और बेहतर ढंग से आधुनिक विधि से खेती के गुर सीखने के लिए केवीके कटिया के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और अध्यक्ष डा. दयाशंकर श्रीवास्तव से संपर्क किया गया है।
बताया कि समूह की महिलाएं मोटे अनाज के साथ ही क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती के तौर तरीके अपनाने के लिए भी जागरूक बना रही हैं। ग्राम पंचायत कैमहरा कला के सीता महिला स्वयं सहायता समूह की कृषि आजीविका सखी किरन ने एक बीघा खेत से अपराजिता की खेती शुरू की है। अब उन्होंने मोटे अनाज की खेती की ओर रुख किया है। उनका कहना है कि इसकी खेती कम लागत में आसानी से की जा सकती है। इसके लिए देसी बीज उन्हें निशुल्क मिले हैं। बस फसल तैयार होने पर दो गुना बीज बैंक में जमा करने होंगे।
मोटे अनाज की बिक्री का जरिया बनेगा एफपीओ
औषधीय फसलों और मोटे अनाज की बिक्री के लिए कृषि सखियाें को भटकना नहीं पड़ेगा। इसके लिए बिसवां ब्लॉक के ग्राम कमुआ में गठित एफपीओ बिसवां अन्नदाता एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी की ओर से इनके उत्पाद खरीदेगी। एफपीओ के निदेशक वेदरत्न और अशोक कुमार गुप्ता की ओर औषधीय और मोटे अनाज की प्राकृतिक खेती के लिए कई साल से क्षेत्र के किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।