सीतापुर। जिले में पिछले दिनों तेज हवा के साथ हुई बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। शासन ने नुकसान का मुआवजा देने का ऐलान किया तो किसानों को राहत की उम्मीद जगी, लेकिन कृषि विभाग के सर्वे में जिले का कोई भी किसान मुआवजे के लिए पात्र नहीं मिला। नियमानुसार 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पर ही मुआवजा दिया जाता है।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले में फसलों का नुकसान 20 से 25 प्रतिशत हुआ है। हालांकि, बीमित फसलों के नुकसान का क्राॅप कटिंग के आधार पर मुआवजा दिलाए जाने की बात अफसर कह रहे हैं।
मार्च में बारिश व ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा गेहूं की फसल प्रभावित हुई। कई किसानों की फसल खेत में पूरी तरह धराशायी हो गई थी। किसानों के अनुसार जो फसल पकने से पहले ही गिर गई, उसमें दाना नहीं बनेगा।
इसके अलावा सरसों की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। मार्च के दूसरे सप्ताह में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों का 10 प्रतिशत नुकसान होना ही कृषि विभाग बता रहा है। इसके बाद 31 मार्च की रात मिश्रिख इलाके में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को फिर भारी नुकसान हुआ।
कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम नुकसान का सर्वे करने में जुट गई। सर्वे लगभग पूरा कर लिए जाने का दावा अफसर कर रहे हैं। कृषि विभाग मिश्रिख इलाके में 20 से 25 फीसदी नुकसान होना बता रहा है। अफसरों के मुताबिक फसलों का नुकसान 33 फीसदी से कम है, इसलिए गैर बीमित फसलों का शासन से मुआवजा हासिल करने के लिए कोई किसान पात्र नहीं है। जिन किसानों की फसलों का बीमा है, उन्हें क्राॅप कटिंग के आधार पर मुआवजा दिलाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बहरहाल, क्राॅप कटिंग के आधार पर मुआवजा मिलना फिलहाल दूर की कौड़ी है। क्राॅप कटिंग प्रक्रिया फसल की कटान के समय अपनाई जाती है। इससे उत्पादन का आंकलन किया जाता है। फिर अफसर रिपोर्ट भेजते हैं, इसके बाद नुकसान का आंकलन कर मुआवजा प्रदान किया जाता है।
यह है क्रॉप कटिंग की व्यवस्था
क्रॉप कटिंग प्रक्रिया से प्रत्येक न्याय पंचायत में अलग-अलग अनाजों की उत्पादन स्थिति पता की जाती है। कम से कम दस किसानों के खेतों में फसलों की कटाई के बाद मढ़ाई अधिकारी, राजस्व कर्मी व कृषि कर्मी की मौजूदगी में होती है। इसके आधार पर क्षेत्र में कृषि उत्पादन के आंकड़े तैयार कर शासन को भेजे जाते हैं। क्राॅप कटिंग के लिए शासन स्तर से ही खेत नंबर तय कर राजस्व व कृषि विभाग को जानकारी दी जाती है। इसके बाद लेखपाल संबंधित किसान से क्रॉप कटिंग की तिथि निर्धारित करता है। उस तिथि पर अधिकारी पहुंचकर इस प्रक्रिया के जरिए कृषि उत्पादन की रिपोर्ट तैयार करते हैं। फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन के लिए क्राॅप कटिंग और भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि बीमाधारक किसान को नुकसान का मुआवजा उस क्षेत्र में क्राॅप कटिंग से उत्पादन के आंकड़ों के आधार पर ही दिया जाता है।
किसान बोले सर्वे के लिए नहीं आए अधिकारी
कृषि विभाग का दावा है कि जिले में सिर्फ 20 से 25 फीसदी फसल को ही नुकसान पहुंचा है। जबकि किसानों का दावा है कि उनके खेत पर कोई अधिकारी या कर्मचारी सर्वे करने पहुंचा ही नहीं।
मिश्रिख तहसील क्षेत्र के भानपुर निवासी किसान अख्तर ने बताया कि आठ बीघा गेंहू बोया था, बारिश व ओलावृष्टि गेहूं की 50 प्रतिशत फसल बर्बाद हुई है। उनके खेत पर कोई भी सर्वे करने नहीं आया। महिपाल ने बताया कि सात बीघा गेंहू बोया था, उनकी गेहूं की 50 प्रतिशत फसल बारिश व ओलावृष्टि में नष्ट हो गई। शाबान का 60 फीसदी व किरतापुर के रामू की पांच बीघा में से 60 फीसदी गेंहू की फसल खराब हो गई। अधिकारियों ने कब सर्वे किया, उन्हें पता भी नहीं चला।
जिले के मिश्रिख इलाके में 31 मार्च की रात बारिश व ओलावृष्टि से फसलों के नुकसान का सर्वे लगभग पूरा कर लिया गया है। गेंहू व सरसों की फसल को 20 से 25 प्रतिशत नुकसान हुआ है। शासन से 33 फीसदी से अधिक नुकसान पर मुआवजा मिलता है। जिन किसानों की फसलों का बीमा है, उन्हें क्राप कटिंग के आधार पर नुकसान का मुआवजा दिलाया जाएगा।
- मनजीत कुमार, जिला कृषि अधिकारी