सीतापुर। एक सप्ताह पहले हुई महज 20 मिनट की बरसात से पूरा शहर जलमग्न हो गया था। कलेक्ट्रेट परिसर सहित तहसील व मोहल्लों में पानी भर गया था। शहर के अधिकांश नाले चोक हो गए थे। जलनिकासी में कई घंटे लग गए थे। इसके बावजूद अभी तक जिम्मेदार अफसरों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया है। अगर समय से इनकी सफाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में मानसून के समय शहर में जलनिकासी का संकट खड़ा हो सकता है।
शहर में जलनिकासी के लिए छोटे, बड़े, मंझोले मिलाकर 50 नाले बह रहे हैं। इन नालों के जरिए पूरे शहर की जलनिकासी होती है। जून माह में मानसून आने की उम्मीद की जा रही है। जबकि मई माह में प्री मानसून बरसात भी हो सकती है। इन हालातों में शहर में जलनिकासी का संकट खड़ा हो सकता है। पिछले बरस भी प्रत्येक बरसात पर पूरे शहर में जलनिकासी की समस्या उत्पन्न हुई थी। नाले चोक होने से गलियों व घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया था। इसकी वजह से यहां के बाशिंदों को काफी अधिक दिक्कतें उठानी पड़ी थी।
इस बार अगर समय से नालों की सफाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में समस्या और भी विकराल हो सकती है। ईओ वैभव त्रिपाठी ने बताया कि शहर के नालों को तीन चरणों में विभाजित करके रोस्टर के अनुसार सफाई अभियान शुरू कर दिया गया है। कुछ नालों की सफाई हो गई है। रोजाना अभियान चलाया जा रहा है। 31 मई तक सभी नालों की सफाई कर दी जाएगी। सफाई के बाद निरीक्षण करके वहां के स्थिति रोजाना देखी जा रही है।
फैक्ट फाइल
शहर में बह रहे हैं बड़े नाले - 03
शहर में बह रहे हैं छोटे नाले - 35
शहर में बह रहे मंझोले नाले - 12