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बाघ के डर से स्कूल नहीं जा रहे बच्चे

Tue, 08 Dec 2015 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
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नैमिषारण्य क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। हालत यह है कि ग्रामीण घर से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। बच्चों का स्कूल जाना भी बंद है।
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गोमती तट के किनारे बसे गांवों में काफी दहशत है। राज नगर, अजीजपुर व बरेठी गांव में बाघ के पगचिह्न मिलने से लोग डरे हुए हैं। इस कारण लोगों ने अपने जानवरों को घरों में कैद करके रखा है।

बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जा रहा है। हालांकि वन विभाग ऐसी संभावना से इन्कार कर रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघिन नरभझी नहीं है।

रास्ता भटक नैमिष में ही घूम रहा बाघ
नैमिष में तीन दिन पहले दिखा बाघ भटक गया है। वन विभाग के टीम के सदस्यों के मुताबिक पगचिह्नों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि बाघ ने तीन दिनों में ज्यादा दूरी नहीं तय की है और वह आसपास के ही गांव के आसपास घूम रहा है।
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हालांकि टीम को एक खेत में बाघ द्वारा खाए गए बछड़े के अवशेष जरूर मिले हैं। सोमवार को वन विभाग की टीम कांबिंग में जुटी तो पगचिह्न भी मिले।

मंगलवार को रेंजर एके सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम राज नगर गांव पहुंची। यहां पर टीम ने राजनगर, बरेठी, निरहन गांवों के आसपास खेतों समेत गोमती तट पर कांबिंग की।

कांबिंग के दौरान ही राज नगर गांव के निकट एक गन्ने के खेत में टीम को एक बछड़े के अवशेष मिले। जहां बछड़े के अवशेष मिले, वहीं बाघ के पगचिह्न आसपास कहीं नजर नहीं आए। जिसकी वजह से खोज में निकली टीम खाली हाथ ही रही।

वन रेंजर ने बताया कि जो अवशेष गन्ने के खेत में मिले हैं, वे अवशेष उस बछड़े के है, जिसको एक दिन पहले जंगली जानवर ने अपना शिकार बनाया था, लेकिन राज नगर के आगे पगचिह्न न मिल पाने के कारण वन विभाग की टीम हलकान है।   
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