सीतापुर। छठ महापर्व की शुरुआत 25 अक्तूबर से नहाय-खाय के साथ होगी। छठ पूजा को लेकर घरों व घाटों की साफ-सफाई शुरू कर दी गई है। शहर के बाजार में लोग पूजा में प्रयोग होने वाली सामग्री व फल इत्यादि की खरीदारी कर रहे हैं। सूर्य उपासना का यह महापर्व मनाने के लिए बच्चाें से लेकर बुजुर्ग तक खासे उत्साहित हैं।
छठ पूजा में स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाता है। चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व का समापन 28 अक्तूबर की भोर उगते सूरज को अर्घ्य देकर किया जाएगा।
जिले में तीन हजार से ज्यादा परिवार छठ पूजा करते हैं। मूल रूप से पूर्वांचलवासियों में छठ पूजा का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु इस दौरान व्रत रखकर अपनी मंगल कामना छठ मईया से करते हैं। सूर्योपासना के इस महापर्व की विशेषता यह है कि इसमें किसी पुरोहित अथवा कर्मकांड की आवश्यकता नहीं होती है। श्रद्धालु बताते हैं कि अपने पाल्यों की समृद्धि और मंगलकामना के लिए की जाने वाली इस पूजा में पवित्रता का विशेष ख्याल रखा जाता है।
इस दाैरान उगते सूरज और ढलते सूरज की पूजा होती है। छठ पूजा का व्रत रखने वाली महिलाएं 27 अक्तूबर की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। अगले दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य समर्पित किया जाएगा।
शहर के चार प्रमुख स्थानों पर छठ पूजा की जाती है। सबसे ज्यादा चहलपहल 27 वाहिनी पीएसी के तालाब व गोल्फ ग्राउंड के तालाब पर होती है। पुलिस लाइन के मंदिर में भी छठ पूजा होती है। इसके अलावा ताड़कनाथ मंदिर में सरायन नदी के तट पर श्रद्धालु छठ पूजा करते हैं। महमूदाबाद के संकटा देवी मंदिर और बसावनपुर के मंशा देवी मंदिर में घाटों की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई का काम किया जा रहा है।
फल व कपड़ों की दुकानों पर रौनक
इस पर्व पर नए वस्त्र धारण करके पूजन-अर्चन करने की मान्यता है। पूजन सामग्री में सेब, संतरा, अंगूर, कद्दू, अनार, नारियल, अमरूद, कच्ची हल्दी, मूली आदि का प्रयोग किया जाता है। शहर के बाजार में बृहस्पतिवार को छठ पूजा से जुड़ी सामग्री की श्रद्धालुओं ने खरीदारी की। कपड़ों व फल की दुकानों पर रौनक बनी रही।
छठ महापर्व की पूजन विधि
इस महापर्व की शुरुआत शनिवार को कद्दू-भात से होगी। पहले दिन बिना लहसुन-प्याज वाले अरवा चावल का भोजन कर नदी के तट अथवा नहर-तालाब के घाट पर पूजन किया जाता है। दूसरे दिन रविवार को खरना होगा। इसमें श्रद्धालु 36 घंटे का उपवास शुरू करेंगे। भगवान को खीर-पूड़ी के साथ ही सभी मौसमी फलों का भोग लगाया जाएगा। तीसरे दिन सोमवार को संध्या अर्घ्य होगी। इसमें नदी, नहर, तालाब के तट पर लोग ढलते सूर्य को प्रणाम कर जल का अर्घ्य देंगे। चौथे व अंतिम दिन मंगलवार को सूर्योदय के समय अर्घ्य और परना होगा। उगते सूर्य को प्रणाम कर अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन होगा।
हर मनोकामना पूरी होती
11 वर्षों से छठ पूजा का व्रत रख रहे हैं। इसको करने से हर मनोकामना पूरी होती है। हमने पुत्र प्राप्ति के बाद से व्रत रहना शुरू किया था। छठ पूजा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। घर की साफ-सफाई के अलावा नए वस्त्र व पूजन सामग्री की खरीददारी शुरू कर दी है।
- मनु रस्तोगी
हम लोगों का सबसे बड़ा पर्व
छठ पूजा बच्चों के सुख समृद्धि के लिए की जाती है। पिछले कई वर्षों से हम छठ पूजा का व्रत रख रहे हैं। माता मंशा देवी मंदिर घाट पर पूजा करते हैं। यह हम लोगों का सबसे बड़ा पर्व है। इसमें कई प्रकार की सब्जी, फल, फूल, मेवा, पकवान चढ़ाए जाते हैं।
- प्रीति प्रजापति