सकरन (सीतापुर)। रासायनिक खादों व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से खेती की उपजाऊ शक्ति लगातार कम होती जा रही है। जमीन धीरे-धीरे बंजर हो रही है। जल, जमीन और वायु को जहरीला होने से बचाने के लिए गो आधारित खेती को बढ़ावा देना होगा। यह बात दि सेकसरिया चीनी मिल बिसवां के प्रमुख सलाहकार व वैज्ञानिक डॉ. राम कुशल सिंह ने काजीपुर में आयोजित किसान गोष्ठी में कही।
उन्होंने किसानों को बताया कि इससे कृषि उपज के रूप में मिलने वाला अनाज, फल, सब्जियां आदि की गुणवत्ता दूषित हो रही है। हमारा स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। अब समय आ गया है कि हम सब पुनः गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें जिससे हमारी धरती बंजर होने से बचेगी। जमीन में कार्बन की मात्रा जो अब लगभग शून्य पर पहुंच रही है, बढ़ जाएगी। हमें स्वस्थ उपज मिलेगी।
उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती की लागत कम करने के लिए किसान सह फसली खेती अपनाएं। गन्ने के साथ दलहनी फसलों की खेती से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होता है। उन्होंने किसानों को गन्ने की सर्वाधिक उपज देने वाली नवीनतम प्रजाति सीओ 15023, सीओ 0118, सीओएस 13235 की बोआई के बारे में जानकारी दी। गोष्ठी में चीनी मिल के डायरेक्टर राजू मिश्रा, किसान शालिगराम गौड़, कपीश कुमार, आशुतोष गौड, वसीम नीरज, राममिलन, विनोद मिश्रा, कौशल जायसवाल, सूर्यकांत यादव, गया प्रसाद, प्रदीप मिश्रा, आलोक, रामलखन, मुकुट बिहारी, देवराज, सतीश मिश्रा, सौरभ मिश्रा, दयाराम, श्याम सुंदर, अंबुज, जगदीश, कौशल, अंकुल वर्मा आदि मौजूद रहे।