परिषदीय विद्यालयों के शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। इसके लिए गुणवत्ता प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा। प्रकोष्ठ में शिक्षा विभाग सहित प्रशासन के अधिकारी सम्मिलित किए जाएंगे।
जिसके जरिए विद्यालयों में होने वाली हर गतिविधि पर पैनी नजर आएगी। प्रत्येक सप्ताह शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस संबंध में शासन ने गुणवत्ता प्रकोष्ठ गठित करने के निर्देश जारी किए हैं।
परिषदीय विद्यालयों का चालू शैक्षिक सत्र गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं आ रहे हैं।
इस पर शासन ने प्रत्येक सप्ताह स्कूलों की हर गतिविधि पर नजर रखने का फैसला किया है। इसके लिए गुणवत्ता प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा।
जिसके जरिए स्कूलों की शैक्षिक प्रगति, बच्चों की उपस्थिति, नामांकन संख्या, प्रार्थना सभा, कैलेंडरवार पढ़ाई, विद्यालय में बनने वाला भोजन, शिक्षकों की उपस्थिति, रंगाई-पुताई, अधिकारियों के निरीक्षण आदि बिंदुओं पर मानीटरिंग की जाएगी। जिसकी रिपोर्ट प्रत्येक सप्ताह शासन को मुहैया कराई जाएगी।
इस प्रकोष्ठ में शिक्षा विभाग सहित प्रशासन के आला अधिकारी शामिल किए जाएंगे। पहले यह प्रकोष्ठ जिला स्तर पर बनेगा। उसके बाद ब्लॉक मुख्यालय पर गठन होगा। जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल होंगे। तीसरे चरण में संकुल स्तर पर गठन किया जाएगा।
संकुल स्तर से रिपोर्ट ब्लॉक को भेजी जाएगी। ब्लॉक स्तर पर उसका परीक्षण होगा। जिस पर बीईओ अपनी रिपोर्ट लगाते हुए जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद शासन को अवगत कराया जाएगा।
30 तक दुरुस्त करें पेयजल व्यवस्था
शासन ने प्रति माह बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी व सह समन्वयकों को विद्यालयों के औचक मुआयने की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं, 30 अगस्त तक परिषदीय विद्यालयों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। बच्चों के सतत मूल्यांकन एवं सत्र परीक्षाएं निर्धारित अवधि तक कराने के भी निर्देश दिए हैं।
एक सप्ताह में होगा गठन
सामुदायिक सहभागिता के जिला समन्वयक डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि शासन ने गुणवत्ता प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश दिए हैं। एक सप्ताह के अंदर प्रकोष्ठ का गठन कर दिया जाएगा। जिसके जरिए स्कूलों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।