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सूर्यदेव से मांगा परिवार की सुख-समृद्धि का वरदान

Wed, 18 Nov 2015 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
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डाला छठ पूजा के अंतिम दिन बुधवार तड़के श्रद्धालुओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद हवन और फिर प्रसाद वितरण कर व्रत का पारण किया। नदी व तालाबों के तट झालरों और दीप से जगमग रहे। मंगलवार शाम अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना के बाद महिलाओं ने रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन किया।
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छठ पूजा के लोक गीत आपन पूजवा लिहीं ये छठी मइया...,सुगनी जो रोइले वियोग से सूरज होय सहाय..., कांच के बहंगिया लचकत जाए...,गोदिया में एक ललन दे दे छठी मइया...समेत अन्य गीत गाकर महिलाओं ने छठ मइया की पूजा कर मन्नत मांगी।

बुधवार भोर होते ही व्रतधारी महिलाओं व पुरुष पूजन सामग्री लेकर पूजित सरोवर व नदी के तटों पर पहुंचे। पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए उन्हें अर्घ्य दिया। इसके बाद आरती और फिर गन्ना, सब्जी, फल, ठेकुए आदि का परंपरागत तरीके से भोग लगाया गया।
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सूर्य उपासना पर्व के अंतिम दिन तालाबों व नदी के घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ा। व्रती महिलाओं ने परंपरागत तरीके से पूजा की रस्में पूरी करते हुए छठी मइया से परिवार के सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

शहर की 27वीं वाहिनी पीएसी, गोल्फ ग्राउंड में तालाब के तट पर और ताड़कनाथ मंदिर के पास सरायन नदी घाट पर बुधवार की अलसुबह श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया। इन पूजा स्थलों पर श्रद्धालु मौसमी फल, गन्ना, फूल इत्यादि सामग्री लेकर परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करने की तैयारी में जुट गए।

आसमान में सूर्यदेव के दर्शन देते ही श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देना शुरू कर दिया। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। सूर्य को अर्घ्य देकर पारण किया गया।
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