सीतापुर। छुट्टा मवेशियों को 31 मार्च तक गोशालाओं में संरक्षित करने का सीएम योगी का फरमान सीतापुर जिले में सिर्फ कागजों में ही पूरा हो रहा है। पशु चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में अब एक भी छुट्टा मवेशी सड़क पर नहीं है। सभी मवेशियों को स्थायी और अस्थायी गोशालाओं में संरक्षित किए जाने का दावा भी विभाग का है लेकिन हकीकत इसके उलट है।
ग्रामीण संपर्क मार्ग हो या फिर लखनऊ को दिल्ली से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग, हर जगह छुट्टा मवेशी नजर आते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के जिम्मेदारों के साथ ही जिला प्रशासन के अफसरों की निगाह भी इन मवेशियों पर नहीं पड़ती।
केस एक :
हरगांव से पिपरझाला जाने वाली सड़क पर यूं तो सफर सुहाना रहता है लेकिन छुट्टा मवेशी मुसीबत बन जाते हैं। अचानक झुंड में मवेशी आ जाते और फिर सड़क यातायात को प्रभावित कर देते हैं। पूरी सड़क पर छुट्टा मवेशी रहते हैं लेकिन जिम्मदारों को ये मवेशी दिखते ही नहीं।
केस दो : मछरेहटा से खैराबाद जाने वाली सड़क बेहतरीन है। बड़ी संख्या में वाहन इस सड़क पर रफ्तार भरते हैं लेकिन छुट्टा जानवर यहां भी मुसीबत का सबब बने हैं। बीहट बीरम गांव के पास यह मवेशी सड़क पर घूम रहे थे लेकिन पशुपालन विभाग को यह छुट्टा मवेशी नजर नहीं आते।
केस तीन :
लखनऊ से दिल्ली को जोड़ने वाला मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-24 कहलाता है। यह भी छुट्टा मवेशियों से मुक्त नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर लुधौरा गांव के पास दिन भर छुट्टा मवेशी नजर आते हैं। कभी सड़क पर बैठते हैं तो कभी डिवाइडर पर दिखते हैं। ये बात और है कि जिम्मदारों की निगाह इन पर नहीं पड़ती।
आंकड़ों में दावे
जनपद में 24 स्थायी और 132 अस्थायी गोशालाएं हैं। स्थायी गोशालाओं में 4,970 मवेशी बंद हैं, जबकि अस्थायी गोशालाओं में 23,895 मवेशी बंद होने का दावा पशु चिकित्सा विभाग कर रहा है ।
छुट्टा मवेशियों के हमले में जान गंवाने वालों को नहीं मिला मुआवजा
सीतापुर। जिले में छुट्टा मवेशियों के हमले और आपस में लड़ रहे छुट्टा मवेशियों की जद में आकर कई घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में कई बार लोग घायल हुए, तो कई बार लोगों की जान भी चली गई। छुट्टा मवेशियों के हमले से मौत होने पर मुआवजे की व्यवस्था है, लेकिन जिले में अब तक एक को भी मुआवजा नहीं मिला है।
एक अप्रैल को खैराबाद थाना क्षेत्र के बेनीपुर सिपहा निवासी चंद्रिका प्रसाद अपने बेटे को रोडवेज बस अड्डे पर छोड़कर बाइक से घर जा रहे थे। बीसीएम मार्ग पर पड़ोस के बाग से लड़ते हुए छुट्टा मवेशी सड़क पर आ गए और चंद्रिका को चपेट में ले लिया। उनकी मौत हो गई। पुलिस और प्रशासन ने इसे दुर्घटना माना और कोई मुआवजा नहीं दिया गया।
लहरपुर कोतवाली क्षेत्र के बिलरिया गांव निवासी पिंटू की मौत एक माह पहले हुई थी। दरअसल, पिंटू को छुुट्टा मवेशी ने दौड़ा लिया था और दौड़ते समय पिंटू गिर गया था। नाराज ग्रामीणों ने हंगामा किया, तो प्रशासनिक अफसरों ने सहायता राशि देने की बात कहकर सबको शांत किया। एक माह बाद भी उसके परिजनों को मुआवजा नहीं मिला। तहसीलदार कहते हैं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सांड़ के हमले से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई, इसलिए मुआवजा नहीं दिया गया।
छह माह पहले मिश्रिख कोतवाली के उत्तरधौना मजरा सुठैला पुरवा निवासी मौजी लाल (40) की आवारा मवेशियों के हमले में मौत हो गई थी। मुआवजा नहीं मिला। सुठैला पुरवा निवासी कृष्ण कुमार (80) की मौत भी सांड़ के हमले में हुई थी। गांव तरसावा निवासी गजराज (35) की मौत भी छुट्टा मवेशी के हमले से हुई थी, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। ग्राम पंचायत तरसावा के रहने वाले फकीरे (55) की मौत करीब 15 महीने पहले सांड़ के हमले से हुई थी। ग्राम पंचायत उत्तर धौना निवासी गया प्रसाद मिश्रा (70) घायल हो गए थे। उन्होंने बताया कि मुझे अभी तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया।