नोटबंदी के बाद जिले की बैंकें सोमवार को भी आर्थिक संकट से जूझती रहीं। लोग रुपये लेने बैंक पहुंचे, लेकिन उन्हें मांग के अनुरूप भुगतान नहीं मिल सका। सभी 325 शाखाओं में कैश की किल्लत रही।
अफसरों की माने तो जिले में रोजाना 46 करोड़ रुपये की जरूरत रहती है पर मौजूदा समय में सिर्फ 11 करोड़ रुपये ही दिये जा रहे हैं। इस कारण लोगों को मांग से कम भुगतान किया जा रहा है।
सबसे बुरा हाल ग्रामीण क्षेत्र की बैंक शाखाओं का है, जहां तमाम बैंकों में कैश खत्म हो गया। जिले में 102 एटीएम हैं, इनमें सोमवार को करीब 20 एटीएम ही चल सके। सोमवार को जिले की बैंकों में 45 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि 12 करोड़ का भुगतान किया गया।
500 व 1000 रुपये की नोटबंदी के बाद जिले में आर्थिक संकट सा आ गया है। सोमवार सुबह आठ बजे से ही बैंक शाखाओं व एटीएम के सामने लोगों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी।
इनमें जिला मुख्यालय पर स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक व एक्सिस बैंक में ही दिव्यांग, महिलाओं व बुजुर्गों को सुविधाएं मिलती नजर आईं। जबकि अन्य बैंक शाखाओं व एटीएम पर सारे नियम कानून किनारे नजर आए।