जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 300 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है, लेकिन इन दिनों यहां महज 16 यूनिट ही ब्लड मौजूद है। उपलब्धता के हिसाब से महज 5.2 प्रतिशत ही खून बचा है। यह खतरे की घंटी है। ऐसे में यदि जागरूकता बढ़े तो यह प्रतिशत बढ़ सकता है। गुरुवार को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस है।
रक्तदान के बड़े-बड़े दावे होंगे पर युवाओं को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बढ़-चढ़कर रक्तदान करना होगा। आपकी यह कोशिश कई जिंदगियों को बचा सकती है। वैसे तो रक्तदान करने में कई मिलों के कर्मचारी, कई संगठनों के कार्यकर्ता अपनी रुचि दिखा रहे हैं, लेकिन अभी भी कई लोग इस मुहिम से नहीं जुड़े हैं।
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. प्रवीन कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि यहां पर उपलब्धता से अधिक खपत हुई है। जिसकी वजह से ब्लड बैंक में मौजूद रक्तकोष में गिरावट आई है। जनवरी से अगस्त तक महज 1147 लोगों ने रक्तदान किया। जबकि 1255 यूनिट ब्लड की खपत हुई है। इसकी वजह यह रही कि रक्तदान कम लोगों ने किया, जबकि जरूरत अधिक लोगों को रही।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इन दिनों बी-नगेटिव व एबी नगेटिव ग्रुप का ब्लड मौजूद नहीं है। जिसकी वजह से इस ग्रुप से जुड़े मरीज लखनऊ के ब्लड बैंक पर ही निर्भर हैं। यदि किसी मरीज को आपात स्थिति में इस ग्रुप के ब्लड की जरूरत पड़ जाए, तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी एक अक्टूबर को खैराबाद आईटीआई कॉलेज में रक्तदान शिविर का आयोजन कर रही है। इसमें सोसाइटी के सदस्य तो रक्तदान करेंगे ही, वहीं छात्रों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस रक्तदान शिविर में छात्रों का ब्लड ग्रुप चेक किया जाएगा और उन्हें बताया जाएगा कि उनका ब्लड का ग्रुप कौन सा है। रेड क्रॉस सोसाइटी उन्हें कार्ड भी देगी।