कमलापुर के पट्टी गांव के पास शनिवार रात नहर कटने से क्षेत्र की करीब एक हजार बीघा फसल डूब गई। रविवार सुबह पानी से लबालब खेत देख किसान दंग रह गए। ग्रामीणों की मानें तो रेल लाइन की पुलिया बनाने के दौरान ठेकेदारों ने नहर के किनारे की मिट्टी निकाल दी, जिससे नहर पटरी कमजोर हो गई।
नतीजतन वह पानी का तेज बहाव नहीं झेल पाई। उधर, नहर कटने की सूचना पर रेलवे के ठेकेदारों ने कटान को रोकने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। जबकि सूचना के बाद भी सिंचाई विभाग का कोई भी अफसर मौके पर नहीं पहुंच सका था।
इन दिनों लखनऊ से सीतापुर के बीच आमान परिवर्तन का काम चल रहा है। छोटी लाइन को बड़ी लाइन में तब्दील करने के दौरान रेल लाइन के दायरे में आने वाली पुलिया भी नए सिरे से बनाई जा रही हैं। कमलापुर रेलवे स्टेशन से सीतापुर की ओर करीब 200 मीटर की दूरी पर माइनर निकली है।
इस माइनर पर रेलवे ने नई पुलिया बनवाई है। पुलिया निर्माण के दौरान रेलवे ठेकेदारों व सिंचाई विभाग के क्षेत्रीय अफसरों की सांठगांठ से मानकों की अनदेखी हुई। बताते हैं कि नहर के दोनों ओर किनारों की मिट्टी काटकर उसे बेहद कमजोर कर दिया गया। इससे शनिवार रात नहर में पानी का बहाव तेज होते ही पट्टी गांव के पास नहर कट गई।
करीब 12 फीट तक कटान होने से नहर का पानी तेजी से आसपास के खेतों में घुस गया। इससे खेतों में खड़ी फसल भी बर्बाद हो गई। रविवार सुबह खेतों की तरफ गए किसान पानी देख दंग रह गए। पट्टी, गढ़ी व महोली गांव के राम प्रसाद, जाहिद अली, पुत्ती, नसीम अली, कल्लू, वफाती, कासिम, रमजान, नूरजहां व सुरेश सहित सैकड़ों किसानों के खेत पानी से लबालब थे। ज्यादातर किसान रबी फसलों गेहूं, आलू, सरसों आदि की बोआई कर चुके थे।
खेतों में पानी भरने से करीब एक हजार बीघा फसलें तबाह हो गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है। सूचना मिलने पर रेलवे ठेकेदारों ने कटान में मिट्टी भरवाकर पानी का रिसाव तो बंद कर दिया लेकिन इस नुकसान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हमीद ने बताया कि 12 बीघे में गेहूं की फसल बोई थी। करीब 20 हजार रुपये की लागत व मेहनत सब बर्बाद हो गई। मन्नालाल ने बताया कि चार बीघे गेहूं की फसल पानी में डूब गई। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा।