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कोरोना से 24 दिन की लंबी जंग जीतकर घर लौटा व्यापारी

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सीतापुर। हौसला हिमालय जैसा, हिम्मत चट्टान जैसी और धैर्य अडिग हो तो कोई भी जंग जीती जा सकती है। इसी को हथियार बनाकर लखीमपुर के मैगलगंज निवासी बैट्री व्यापारी उमाशंकर पांडेय ने कोरोना से जंग जीत ली है। 50 साल के व्यापारी उमाशंकर लॉटरी में नाम आने पर कंपनी की ओर से तुर्की गए थे, जहां से आठ मार्च को घर आए। वह बताते हैं कि 11 मार्च को बुखार, पेट दर्द की समस्या हुई।
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महोली कस्बे से लेकर जिला अस्पताल सीतापुर, प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराया। दवाएं खाई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। 18 मार्च को केजीएमयू में कोरोना की जांच कराई। 19 की सुबह रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने की बात सुनकर शरीर में सिहरन दौड़ गई। चार-पांच दिन खाना, पीना ही छूट गया। भूख-प्यास गायब सी हो गई थी।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि एक दिन चाय पीते समय हाथ से डिस्पोजल का ग्लास छूटकर गिर गया था। डर से पूरा शरीर कांप रहा था। दाल, रोटी की महक तक अच्छी नहीं लग रही थी, लेकिन इस बीच डॉक्टरों की टीम आई और देखा। तबियत पूछी। उठकर बैठने को कहा तो हिम्मत नहीं थी। धरती के भगवान ने हिम्मत बढ़ाई तो उठकर बैठे। रात में एक टेबलेट दी।
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सुबह डॉक्टर आएं, उन्होंने हौसला बढ़ाया। कहा कि खाना नहीं खाओगे तो इम्युनिटी कैसे बढ़ेगी और फिर इतनी बड़ी लड़ाई कैसे लड़ोगे। डॉक्टरों की हिम्मत से उमाशंकर का हौसला बढ़ गया। आधी परेशानी दूर हो चुकी थी। बताते हैं कि उसी दिन उन्हें अगल वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां हर सुविधाएं थी। गर्म पानी से नहाने के बाद खाना खाया। नमक, पानी से गरारा करना शुरू किया।
डॉक्टरों की एडवाइज को फॉलो करते रहे। आखिरकार 10 मार्च को हिम्मत, हौसला और धैर्य के हथियार से 24वें दिन कोरोना से जंग जीतकर अपनों के पास पहुंच गए। उन्हें अपने बीच देखकर परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। सभी बेहद खुश हैं।
रिपोर्ट देखकर बढ़ जाती थी उम्मीद
13 दिन तक चले इलाज के बाद 30 मार्च को कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई तो उम्मीद बढ़ी कि वह जल्द ही घर पहुंच जाएंगे, लेकिन दो दिन रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डिस्चार्ज करने का डॉक्टरों ने फैसला बदल दिया। अब तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद डिस्चार्ज किया गया।
कोरोना से जंग जीतने वाले उमाशंकर बताते हैं कि भर्ती रहने के बाद कुछ दिनों तक टीवी देखी, लेकिन खबरें सुनकर डर सा लगने लगता था, फिर टीवी का प्लग निकाल दिया। इसके बाद टीवी देखी नहीं। बताया कि बाकी के दिनों में परिवार के लोगों, रिश्तेदारों, कंपनी के लोगों से बातकर खौफ के बीच अच्छी-अच्छी बातें करके रिश्तों में मिठास घोलते रहे। फिर 24 दिन कैसे कट गए, पता ही नहीं चला।
महामारी को हल्के में न लें, घर में ही रहें
उमाशंकर ने लोगों से अपील की हैं कि महामारी को हल्के में न लें। सरकार और प्रशासन के आदेशों का पालन करें। घर पर ही रहें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। दिन में कई बार साबुन, सैनिटाइजर से हाथ धोते रहे। मास्क लगाए रहें। वह अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर में 14 दिन के लिए क्वारंटीन हैं। घर परिवार से दूरी बनाए हुए हैं। खाना, बर्तन सब अलग है।
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