बारिश व बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के चलते नदियां मैदानी इलाकों में कहर बरपा रही है। जिले के गांजरी क्षेत्र में घाघरा में आई बाढ़ का पानी बढ़ता ही जा रहा है। उफनाई घाघरा तेजी से कटान भी कर रही है।
खासकर पचीसा टापू पर मुसीबत बढ़ गई है। बीते 24 घंटे में टापू पर 100 बीघा जमीन कटकर बह गई है। जबकि रेउसा क्षेत्र में करीब 1000 बीघा से अधिक खेती जलमग्न हो गई है। बाढ़ के पानी से टापू पर हड़कंप मचा है।
लोग प्रशासन की मदद का इंतजार कर रहे हैं। उधर, तटीय क्षेत्रों के बाढ़ प्रभावित गांवों में जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। करीब 13 गांवों में पानी घुसा हुआ है। गांव के गलियारों में अब नावें चल रहीं हैं।
घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में तेजी से कटान हो रही है। बीती रात गांव के निवासी तहसीलदार, फौजदार, गुरुप्यारे, गोकरन, ज्वाला, पैकरमा, विक्रम की 86 बीघा जमीन कटकर नदी में बह गई।
यहां के बाशिंदों ने अपनी झोपड़ियों को समेट कर टापू के ऊंचे हिस्से पर बसना शुरू कर दिया। टापू के बाशिंदों की माने तो चारों तरफ घाघरा का पानी ही दिख रहा है। तीन तरफ से नदी टापू पर कटान कर रही है।
टापू का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। नदी का जलस्तर जिस हिसाब से बढ़ रहा है, उससे पूरे टापू पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यहां के बाशिंदे भयभीत हैं। जो अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा के लिए प्रशासन की मदद की राह तक रहे हैं।
टापू से सीतापुर की तरफ करीब 9 किलोमीटर दूरी तक घाघरा की बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। ऐसे पानी में नाव जवाब दे रही हैं। इधर तटीय इलाके के 13 गांवों में बाढ़ से हालात भयावह होते जा रहे हैं।
यहां गुरुवार को भी जलस्तर बढ़ता रहा। जहां पर रास्ते थे, वहां पर बाढ़ का पानी नजर आ रहा है। आवागमन के लिए लोग नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। सड़कों के ऊपर नावें चल रही हैं। निरंतर बढ़ रहे पानी की वजह से गांव के बाशिंदों ने सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन शुरू कर दिया है।
अधिकांश परिवार क्षेत्र की सड़कों पर डेरा डाल रहे हैं। गुरुगुचपुर के निकट बाढ़ की वजह से कटी पुलिया को अब तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है। जिसकी वजह से क्षेत्र के 20 गांव के लोग फंसे हैं। क्षेत्र के 22 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं, जिनकी तरफ बाढ़ का पानी बढ़ रहा है।
कोनी रेउसा क्षेत्र में करीब 1000 बीघा खेती बाढ़ के पानी में जलमग्न नजर आ रही है। जहां कुछ दिन पहले फसलें लहलहा रही थीं, वहां घाघरा का पानी हिलोरे मार रहा है। बाढ़ में अभी राहत नजर नहीं आ रही है। गुरुवार को घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से 3,18,640 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।