सीतापुर। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इस समय खून का संकट गहराने लगा है। इस समय ब्लड बैैंक में महज 10 यूनिट खून बचा है। जबकि रोजाना सात से आठ मरीजों को ब्लड की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में डोनेट करने वालों के जरिये ही उनको खून दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक है। इसके जरिये सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों की खून की जरूरत पूरी की जाती है। इस समय ब्लड बैंक में खून की किल्लत है। यह किल्लत कोविड की तीसरी लहर के दौरान हुई है। ब्लड बैंक से रोजाना सात से आठ मरीज खून लेने आते हैं। ऐसे में उनको खून मिलने में समस्या आ रही है।
सबसे अधिक दिक्कत उन मरीजों के सामने आती है, जिनको जिस ग्रुप के खून की जरूरत होती है, उस ग्रुप का बैंक में खून नहीं होता है। इन परिस्थितियों में अगर परिजन मरीज के ग्रुप का ही डोनेट करने वाले की तलाश कर लाते हैं, तभी उसको खून मिल पाता है। करीब दो माह पहले डोनेट करने वालों के जरिये आसानी से जरूरत का खून मिल जाता था।
कोरोना की तीसरी लहर में ब्लड की डिमांड घट गई है। ब्लड बैंक प्रशासन का कहना है कि सर्दियों से पहले रोजाना 12 से 15 यूनिट ब्लड की मांग होती थी। इस समय सर्दी अधिक होने व कोविड के चलते इसमें गिरावट दर्ज की गई है। अब सात से आठ यूनिट की डिमांड रोजाना की बनी हुई है।
केवल ओ पॉजिटिव है खून
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इस समय केवल ओ पॉजिटिव ग्रुप का ही खून है। अन्य ग्रुप का खून न होने से समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके पीछे ब्लड बैंक के प्रभारी का कहना है कि कोविड के कारण रक्तदान शिविर आयोजित नहीं हो रहे है। जबकि मांग रोजाना बनी हुई है। इसी वजह से ब्लड का संकट खड़ा हो गया है।
सामाजिक संस्थाएं लगाएं शिविर
ब्लड बैंक में खून की कमी बनी हुई है। सामाजिक संस्थाओं से अपील है कि वे रक्तदान शिविर आयोजित करें, जिससे इस कमी को पूरा किया जा सके। ब्लड बैंक आने वाले मरीजों को डोनेट करने वालों के जरिये खून उपलब्ध कराया जा रहा है।
- पूजा यादव, ब्लड बैंक प्रभारी