सीतापुर। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में लगी बायो केमेस्ट्री मशीन पिछले आठ दिनों से खराब है। इस वजह से लिवर व किडनी से जुड़ी जाचें प्रभावित हैं। रोजाना करीब 300 मरीज बिना जांच कराए ही लौट रहे हैं। कुछ मरीज निजी पैथोलॉजी का रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी जेबें भी ढीली हो रही हैं।
जिला अस्पताल की पैथाेलॉजी में इस समय 600-650 के बीच रोजाना जांचें हो रही हैं। इन जांचों में करीब 300 ऐसे मरीज होते हैं, जिनको लिवर व किडनी की समस्या के चलते जांच की जरूरत पड़ रही है। 26 सितंबर को यह मशीन खराब हुई थी। उसके बाद से मशीन काम नहीं कर रही है।
मरीज जांच करवाने के लिए निजी पैथाेलॉजी का रुख कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन रोजाना मैकेनिक आने की आस लगाए हुए हैं। लेकिन आपूर्तिकर्ता कंपनी की तरफ से मैकेनिक न आने से यह मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है। मंगलवार को अपने पिता की जांच करवाने आए बबलू ने बताया कि भूख नहीं लग रही थी तो चिकित्सक ने लिवर की जांच करवाने को कहा। बाहर से जांच करवानी पड़ रही है। इसी तरह उपेंद्र ने बताया कि तीन दिन से लौट रहा है। अब बुधवार को फिर से बुलाया गया है।
इमरजेंसी के पास टहलते रहते हैं मवेशी
जिला अस्पताल परिसर मवेशियों का अड्डा बन गया है। मंगलवार को कई मवेशी इमरजेंसी गेट के सामने खड़े नजर आए। इसके चलते अस्पताल आने वाले मरीज इनसे बचकर निकलते रहे। एक तीमारदार को तो मवेशी ने हाथ में सेब पकड़े देख दौड़ा भी लिया।
तीन घंटे देरी से शुरू हुआ अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल परिसर में अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए मंगलवार को मरीज घंटों इंतजार करते रहे। सुबह नौ बजे यह जांचें शुरू हो जानी चाहिए। लेकिन तीन घंटे देरी से जांचें शुरू हुईं। दोपहर 12 बजे जब जांच शुरू हुई तो अफरातफरी मच गई। रवि ने बताया कि सुबह 8.30 बजे नंबर लगा दिया था। लेकिन एक बजे जांच करवा पाए। इसी तरह तमाम मरीज इंतजार ही करते रहे।