बस जरूरत है दृढ़ इच्छा शक्ति से काम करने की। शहर में जर्जर सड़कें, चौपट ड्रेनेज सिस्टम, बदहाल बिजली व ध्वस्त ट्रैफिक व्यवस्था ही प्रमुख समस्या है।
स्मार्ट बनने के लिए हमें इन्हीं दिक्कतों से निजात पानी होगी। पर्याप्त आपूर्ति न मिलने से जहां उद्योग-धंधों पर असर पड़ रहा है। बरसात के समय जलनिकासी व्यवस्था ठप हो जाती है। पौने दो लाख की आबादी सीवर समस्या से जूझ रही है। शहर में केवल एक ही सीवर लाइन है।
वह भी अक्सर चोक रहती है। कहने को तो शहर में मेजर ध्यानचंद स्टेडियम है, लेकिन यहां खेलकूद सामग्री से लेकर प्रकाश तक की व्यवस्था दुरुस्त नहीं। खेलों के कोच नहीं हैं। शहर के प्रमुख लालबाग बाजार में पार्किंग के अभाव में वह बेतरतीब ढंग से वाहन खड़ा करते है।
अगर इन समस्याओं को दूर कर दिया जाए तो हम भी स्मार्ट बन सकते हैं। जनता प्रशासन, सांसद, विधायक व नगरपालिका चेयरमैन से ढेरों अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए टकटकी लगाए हुए है।