हजार व पांच सौ रुपये की नोटबंदी के 26 वें दिन भी बैंकों का सिस्टम पटरी पर नही आया है। सोमवार को भी बैंके खाता धारकों को रुलाती रही। जिले की बैंकों में कैश की किल्लत बताई जाती रही। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकों में कैश का संकट रहा। कुछ ऐसा ही हाल जिले के एटीएम का भी रहा। अधिकांश एटीएम खामोश रहे, गिने चुने जो एटीएम चले भी, वे भी हांफते नजर आए।
किसी में कैश खत्म हो रहा था, तो किसी में तकनीकी खामी आ रही थी। सोमवार का दिन लोगों के लिए बेहद तकलीफ देने वाला रहा। इसकी एक वजह ये भी रही कि आज का दिन बेहद हाड़ कंपाऊ रहा। इस कड़कड़ाती ठंड में भी लोग बैंकों व एटीएम के सामने कतार में खड़े हुए। बावजूद इसके तमाम लोगों को भुगतान नही हो सका।
8 नवंबर को देश के प्रधानमंत्री ने 500 व 1000 रुपये की नोट पर पाबंदी लगा दी थी। जिसके बाद बैंकों में कैश का संकट आ गया। रविवार को बैंक बंद थे, इस वजह से सोमवार को लोगों को बैंकों से कैश मिलने की उम्मीद थी। सोमवार की सुबह जब लोगों की नींद खुली, तब पूरा जिला कोहरे की चादर से ढका हुआ था, वहीं तेज सर्द हवाएं चल रही थीं। ठंड हाड़ कंपाऊ थी, इसके बावजूद लोग इस सर्द मौसम में घरों से निकल कर बैंकों व एटीएम की तरफ चल दिए।
जिला मुख्यालय पर सुबह दस बजे बैंके खुले, जिसके बाद लोगों को भुगतान करने का काम शुरू हुआ। स्टेट बैंक में लोगों को कम से कम रकम निकालने का निवेदन किया जाता रहा। अधिक जरूरतमंद को 10 हजार रुपये तथा अन्य लोगों को 5 हजार रुपये तक का भुगतान किया जाता रहा। दोपहर बाद शहर की इलाहाबाद बैंक शाखा में रुपये न होने की बात बताई जाने लगी।
उधर लहरपुर कस्बा व क्षेत्र की बैंकों में भी कैश की किल्लत बताई जाती रही। अधिकांश बैंकों में कैश मौजूद न होने की बात कही गई। यहां भी एटीएम पूरी तरह से शांत रहे। तंबौर, रेउसा, बिसवां में भी बैंकों में कैश की किल्लत रही। इन क्षेत्रों के एटीएम भी शो पीस बने रहे। लोग हाड़ कंपाऊ ठंड में बैंक पहुंचे जरूर, लेकिन भुगतान न मिलने से उनके हाथ मायूसी लगी।
महमूदाबाद, सिधौली, महोली, मिश्रिख, हरगांव, मछरेहटा आदि कस्बों की स्थिति कोई जुदा नहीं थी। इन क्षेत्रों की बैंकों में भी कैश की किल्लत रही। जिले के 102 एटीएम में सोमवार को करीब 6 एटीएम ही चलते नजर आए। हालांकि बैंकों का दावा है कि करीब 25 एटीएम चलाए गए हैं।
सोमवार को बैंकों में करीब 20 करोड़ रुपया बैंकों में जमा किया गया। जबकि सात करोड़ रुपया ग्राहकों को भुगतान किया जाना बताया जा रहा है। बैंकों में कैश के संकट की प्रमुख वजह आरबीआई से नई करेंसी का सीतापुर न पहुंचना बताया जा रहा है।
इसलिए बढ़ी भीड़
यहां बता दें कि रविवार को बैंक बंद थे। जबकि लोगों का कहना है कि मंगलवार को भी बैंक बंद रहेंगे। बैंकों के बंद होने के कारण लोग सोमवार को ही अपने खातों से जरूरत भर की रकम निकाल लेना चाह रहे थे। यही वजह रही कि सोमवार को दो गुनी भीड़ जिले की हर बैंक में देखने को मिली।
अब भी कैश नही आया
नोटबंदी के बाद यहां पर मांग के अनुरूप आरबीआई से कैश नही आ सका है। बताया जा रहा है कि नोटबंदी के बाद सिर्फ एक बार ही नोट की खेप यहां के चेस्ट तक पहुंचाई गई थी। उसके बाद अगली खेप यहां पहुंच ही नही सकी। जितना रुपया इस जिले में आया था, उस रुपये को उस दौरान बड़ी ही तेजी से भुगतान किया गया था।
कई दिनों के बाद भी जब नोट की अगली खेप जिले में नहीं पहुंची, तब बैंकों के हाथ खाली हो गए। अधिकारियों ने बताया कि अब जो फुटकर रुपया बैकों में जमा हो रहा है, उसी रुपये से खाता धारकों को भुगतान किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मंगलवार तक इस जिले में नई नोटों की अगली खेप आ जाएगी। तब बैंकों में कैश का संकट खत्म हो सकता है।
थककर चूर होते रहे बुजुग
रामकोट थाना क्षेत्र के ग्राम मोहिद्दीनपुर निवासी ओमप्रकाश पेंशन निकालने के लिए स्टेट बैंक शाखा में आए थे। यहां लाइन में लगकर वे अपनी बारी का इंतजार करने लगे। देरी होते ही वे अपने आप को संभाल न सके। इस वजह से थककर लाइन में ही बैठ गए। ओमप्रकाश बोले कि खड़े होने भर की उनके पास ताकत नही है, जिसकी वजह से बैठे-बैठे ही लाइन में आगे खिसक रहा हूं।
मंगलवार तक आ सकता है कैश
जिले की बैंकों में जो कैश जमा हो रहा है, उसी से बैंके भुगतान कर रही हैं। मंगलवार तक आरबीआई से नोटों की अगली खेप आने की उम्मीद है। जैसे ही नए रुपये यहां पहुंचेगे, कैश की किल्लत समाप्त हो जाएगी। -सिद्धार्थोपॉल, एलडीएम