रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। सरयू और शारदा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से गांजर के हालात नाजुक होते जा रहे हैं। बेकाबू लहरों ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। गांजर में करीब 40 गांव पानी से घिर गए हैं। कई गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। सैकड़ों बीघा फसलें डूब गई हैं। किसी भी समय लहरें गांवों के भीतर प्रवेश कर सकती हैं। अफरातफरी के बीच तटवर्ती इलाके में रहने वाले ग्रामीण सामान समेटकर नाव से सुरक्षित ठिकाने की ओर पलायन करने लगे हैं।
पहाड़ों पर भारी बारिश एवं बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी ने गांजर को बाढ़ के मुहाने पर पहुंचा दिया है। पिछले चार दिनों से लगातार जलस्तर में वृद्धि से लहरें नदी का दायरा छोड़कर आबादी की तरफ रुख कर चुकी है। रेउसा इलाके में मंगलवार को ग्रामीण नींद से उठे तो हर तरफ पानी ही पानी दिखाई दिया। सरयम के किनारे बसे नगीनापुरवा, लालापुरवा, मरैली, दुर्गापुरवा, फौजदारपुरवा, लोधनपुरवा, परमेश्वर पुरवा, खुशीराम पुरवा, रामलाल पुरवा, कटैला पुरवा, ठेकेदार पुरवा, जैतहिया, विल्लरपुरवा, जट पुरवा, भदिम्मर पुरवा, मेवड़ी छोलहा, धूसपुरवा, पासिन पुरवा, गवढ़ी बजहा, समयदीन पुरवा, गार्गी पुरवा, नसीरपुर, नई बस्ती चहलारी, बारिन पुरवा, ठेकेदार पुरवा, दर्जिन रेती, बाहरपुर, सलामत पुरवा आदि गांव पानी से घिर गए हैं।
गुरगुजपुर रोड से जंगल टपरी, फौजदारपुरवा, दुर्गापुरवा, बजहा समेत कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी हिलोरे मार रहा है। सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। हालात यह है कि खेत जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। इन गांवों के चारों तरफ पानी ही पानी देख हाहाकार मच गया। जानमाल की सुरक्षा के दृष्टिगत ग्रामीण पलायन करने लगे हैं। गौलोक कोडर के करीब स्थित त्यागी बाबा के आश्रम में पानी भर गया है। उधर, रामपुर मथुरा इलाके में भी सरयू कहर ढाने लगी है।
कनरखी, सोती पुरवा, हरी पुरवा, बंगाली पुरवा, बलेसर पुरवा, सुकुल पुरवा, सुंदरपुरवा, कुन्ना पुरवा, टपरा, रामरूप पुरवा, नगेश्वर पुरवा, बुचऊपुरवा, छोटे पुरवा तथा अगरौरा व अखरी समेत 20 से अधिक मजरे पानी से पूरी तरह घिर चुके है। गांवों के बाहर तक पानी पहुंचने से मनीश कुमार की सात बीघा, ज्ञानेन्द्र की 12 बीघा, संदीप कुमार की 20 बीघा, मुनेष्वर की चार बीघा, बाबूराम की छह बीघा, मनोहर की सात बीघा, मुन्ना की चार बीघा समेत कई किसानों की सैकड़ों बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। कनरखी के प्रधान अपनी ग्राम पंचायत के लोगों को नाव से सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे है। इसी तरह अन्य गांवों के लोग भी अपना सामान समेटकर तटबंध के किनारे पॉलिथीन और तिरपाल तानकर रहने की व्यवस्था कर रहे है।
ठप हो सकता बांध पर चल रहा बचाव कार्य
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। भारी बारिश और उफनाई सरयू के कारण बांध के कटने का खतरा बढ़ता जा रहा है। जगह-जगह रेनकट हो गए है। बाढ़ राहत व बचाव कार्य लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है। बचाव कार्य संतोषजनक स्थिति में पहुंचाने के लिए जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूल रहे है।
क्षेत्र के बगस्ती, केवडा गांव के किनारे चहलारी घाट गनेशपुर तटबंध का मरम्मत कार्य चल रहा है। देर से शुरू हुए इस कार्य को बाढ़ आने से पूर्व पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब भारी बारिश बचाव कार्य में बाधा बन सकती है। मंगलवार को बाढ़ राहत बचाव कार्य का निरीक्षण करने के लिए चीफ इंजीनियर राकेश कुमार गुप्ता तटबंध पर पहुंचे।
उन्होंने बताया कि काम संतोषजनक स्थिति में है, अब बांध कटने का कोई भय नहीं है। मालूम हो कि पिछले वर्ष सिंचाई विभाग के बांध सुरक्षित होने के दावे के बावजूद बगस्ती गांव के किनारे करीब 100 मीटर की लंबाई में बांध कट गया था। गनीमत रही की तटबंध कटने के बाद जलस्तर में वृद्धि नही हुई। अबकी शासन ने 45 करोड़ रुपये का बजट मंजूर करवा कर पुन: बगस्ती से केवड़ा तक 700 मीटर के बांध की मरम्मत का कार्य 15 मई से शुरू कर दिया। जिसमें चार ठोकरें बनाई गई है, पर इन पर पत्थर लगने का कार्य अभी भी अधूरा है।
तहसीलदार बिसवां राजकुमार गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को बैराजों से पानी नहीं डिस्चार्ज किए जाने से कुछ राहत मिलेगी। इससे जलस्तर में कमी आएगी। तटीय इलाकों की बराबर निगरानी की जा रही है। नदी के किनारे बसे मजरों के ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा गया है। अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं है।
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