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अयोध्या मामला - ऐतिहासिक निर्णय... ऐसा लगा मानों त्रेता युग आ गया

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नैमिषारण्य (सीतापुर)। 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोस्थली ने अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का खुले मन से स्वागत किया।
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विश्वविख्यात नैमिषारण्य तीर्थ के संतों ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि जैसे त्रेता युग आ गया हो और भगवान राम का प्राकट्य आज ही हुआ है।
हमारे लिए यह तारीख अविस्मरणीय है। उल्लास में डूबे संतों ने भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने का संदेश भी समाज को दिया है।
बनाए रखें सौहार्द्र का वातावरण
देश की सबसे बड़ी अदालत का फैसला ऐतिहासिक और सर्वमान्य है। ऐसा लग रहा है मानो त्रेता युग आ गया और आज ही भगवान राम का प्राकट्य हुआ है। हम सभी सनातन धर्म के अनुयायियों से अनुरोध करते हैं कि धैर्य और सौहार्द का वातावरण आगे भी बनाए रखें।
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- महंत भरतदास, अध्यक्ष 84 कोसी परिक्रमा समिति
भारतीय संस्कृति की हुई विजय
सर्वोच्च न्यायालय में भारतीय संस्कृति की विजय हुई है। भगवान श्रीराम जहां करोड़ों हिंदुओं के आस्था के प्रतीक हैं, वही सत्य के मार्ग पर चलना सिखाने वाले हम सभी मानवों के आदर्श हैं। सत्य की साक्षात मूर्ति श्रीराम की जन्मभूमि के फैसले में भी सत्य की ही विजय हुई है।
- गोपाल शास्त्री, काली पीठाधीश
स्वागत योग्य है निर्णय
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। इस निर्णय को सहर्ष स्वीकार करना सभी देश वासियों का दायित्व है। किसी भी स्थिति में भाईचारे और सद्भाव को हमेशा की तरह यथावत बनाये रखना हमारी परंपरा रही है। अपनी इस परंपरा का निर्वहन हम सबको करते रहना है।
- बजरंग दास, महंत हनुमानगढ़ी
आपसी प्रेम को बनाए रखें
बचपन से ही रामलला जन्मभूमि पर फैसले का इंतजार करता आ रहा हूं। आज शुभ घड़ी आई है। ये करोड़ों सनातन धर्मियों के जीवन के सबसे अविस्मरणीय पलों में से एक है। अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि आपसी प्रेम और सद्भाव को किसी भी स्थिति में बिगड़ने न दिया जाए।
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- मनीष शास्त्री, महंत सूतगद्दी मंदिर
कोई भी फैसला होता स्वीकार
भारतीय न्याय व्यवस्था को निर्णय के लिए धन्यवाद। फैसले के बाद आज भले ही भव्य राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन सारा संत समाज किसी भी फैसले को सहर्ष स्वीकार करने के लिए पूरी तरह से तैयार था। राम किसी धर्म विशेष के नहीं हैं। वह उस भारतीय सभ्यता के आदर्श हैं, जिसमें सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान प्राप्त है।
- संतोष दास, महंत बनगढ़
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