नैमिषारण्य में मां ललिता देवी का पूजन करते शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद।
नैमिषारण्य (सीतापुर)। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गाय को राष्ट्रमाता घोषित कराने की मांग को लेकर शंखनाद धर्म यात्रा पर हैं। इसी क्रम में सोमवार को उन्नाव व हरदोई की सीमा से होते हुए वह 88 हजार ऋषियों की तपोभूमि नैमिषारण्य पहुंचे।
यहां सबसे पहले व्यास आश्रम के मुख्य द्वार पर व्यासपीठाधीश्वर प्रतिनिधि रंजीत दीक्षित ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने मां ललिता देवी मंदिर में पूजन-अर्चन किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
वहां से शंकराचार्य पौराणिक चक्रतीर्थ पहुंचे, जहां उन्होंने चक्रतीर्थ का पूजन किया और आरती में शामिल हुए। इसके बाद यात्रा परमार्थ धाम आश्रम पहुंची, जहां भक्तों ने उनकी पादुका का पूजन किया। सूर्यास्त के बाद मौन धारण करने के कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। मंगलवार को वह सिधौली में जनसभा को संबोधित करेंगे।
प्रधान पुजारी ने मंदिर परिसर में गाड़ी ले जाने से रोका
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का काफिला जब ललिता देवी मंदिर की ओर बढ़ रहा था तो मंदिर के प्रधान पुजारी गोपाल शास्त्री ने उनकी गाड़ी रोक दी। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के भीतर वाहन ले जाना उचित नहीं है। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गाड़ी से उतरकर पैदल ही मंदिर परिसर में पहुंचे और दर्शन-पूजन किया।