नैमिषारण्य (सीतापुर)। होलिका दहन के लिए रात को 1:14 घंटे का शुभ मुहूर्त बन रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा को 24 मार्च की रात 11:13 बजे से होलिका दहन किया जा सकेगा।
इस बार होलिका दहन पर सर्वार्थ सिद्ध और रवि योग बन रहा है। रंगों का पर्व होली 25 मार्च को मनाया जाएगा। आचार्य रमेश शास्त्री ने बताया कि पूर्णिमा 24 मार्च को सुबह 9:54 बजे से शुरु होगी, जो 25 मार्च दोपहर 12:29 बजे तक रहेगी। भद्रा का योग रात 10:28 बजे तक रहेगा। पूर्णिमा में ही होलिका में अग्नि दी जाती है। इसलिए 24 मार्च की रात्रि में 11:13 बजे से 12:27 बजे तक के अंतराल में होलिका दहन करना फलदायी होगा।
आचार्य ने बताया कि होलिका दहन में किसी वृक्ष की शाखा को जमीन में रोपकर उसे चारों तरफ से लकड़ी व उपले से घेरकर निश्चित मुहूर्त में जलाना चाहिए। भारतीय नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की पहली तिथि को शुरू होता है। इसके आगमन के पूर्व पुराने संवत्सर को विदाई देने और इसकी नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए होलिका दहन किया जाता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए काले तिल के दाने, बीमारी से मुक्ति के लिए हरी इलायची व कपूर, धन लाभ के लिए चंदन की लकड़ी, रोजगार के लिए पीली सरसों, वैवाहिक समस्याओं के समाधान व नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए काला सरसों व हवन सामग्री होलिका में डालना शुभ फलदायी होता है।
भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान ने रची थी माया
होलिका दहन से जुड़ी सबसे प्राचीन कथा श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण में मिलती है। कथा के अनुसार भगवान श्रीहरि के प्रिय भक्त प्रह्लाद का जन्म राक्षस कुल में हुआ था। उनके पिता हिरण्यकश्यप श्रीहरि विष्णु से द्रोह रखते थे। उन्होंने क्रोधवश अपने पुत्र प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका के साथ अग्नि में बैठा दिया। होलिका को अग्नि से रक्षा का वरदान प्राप्त था, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद की रक्षा और होलिका की मृत्यु हो जाती है। तबसे होलिका दहन की परंपरा प्रचलन में है।