सीतापुर। जिला महिला अस्पताल में गुरुवार को जबरन अंदर घुसने की कोशिश कर रही आशा को गेट पर तैनात महिला सिपाही ने रोक दिया। इससे गुस्साई आशा ने गर्भवती सिपाही के साथ हाथापाई की और हाथ से डंडा छीनकर उसे धक्का दे दिया। उस वक्त एक एंबुलेंस अस्पताल के अंदर जा रही थी। गनीमत रही कि सिपाही उसकी चपेट में आने से बाल-बाल बच गई, फिर आशा ने अस्पताल के गेट पर लेटकर जमकर हंगामा किया। सिपाही पर पीटने का आरोप लगाया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया।
कोरोना वायरस फैलने की आशंका में जिला महिला अस्पताल में सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा और सीएमएस डॉ. सुषमा कर्णवाल ने आशाओं के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। कोरोना काल में आशाओं को डफरिन में एंट्री की इजाजत नहीं है, लेकिन इसके बाद भी गुरुवार सुबह आशा विमला अस्पताल में घुसने की कोशिश कर रही थी। बताते हैं कि अस्पताल गेट पर तैनात शहर कोतवाली की महिला सिपाही डॉली रानी ने आशा को अंदर जाने से रोका। इस पर आशा भड़क गई और जबरन घुसने की कोशिश करने लगी।
मना करने पर गर्भवती महिला सिपाही से धक्का-मुक्की शुरू कर दी। सिपाही का आरोप है कि आशा ने उसके हाथ से डंडा खींचने के बाद धक्का दे दिया, इससे सिपाही अस्पताल गेट से गुजर रही एंबुलेंस में टकराने से बाल-बाल बच गई। देखते ही देखते गेट पर आशा ने हंगामा शुरू कर दिया। वह अस्पताल गेट पर लेट गई और नारेबाजी करने लगी। हंगामा कर रही आशा ने आरोप लगाया कि सिपाही ने अंदर जाने से मना किया और इसके बाद डंडे से उसकी पिटाई कर दी। उसका पैर टूटा हुआ है।
प्लास्टर चढ़ा है। इसके बाद भी सिपाही ने डंडों से उसकी पिटाई कर दी। सिपाही ने पिटाई से इनकार किया है। आशा का हंगामा बढ़ता देख कई और आशाएं भी समर्थन में खड़ी हो गई। मामले की सूचना पाकर सीएमएस डॉ. सुषमा कर्णवाल, शहर कोतवाली की पुलिस मौके पर पहुंची। सीएमएस और पुलिस ने मामले को शांत कराया। करीब एक घंटे तक अस्पताल गेट पर हंगामा होने से अफरातफरी का माहौल बना रहा है।
सिपाही ने जीडी में डलवाया तस्करा
आशा से हुए विवाद को लेकर महिला सिपाही ने फिलहाल शहर कोतवाली में तस्करा डलवा दिया है। जीडी पर लिखे गए तस्करे में पूरे मामले का जिक्र सिपाही की ओर से किया गया है। सूत्र बताते हैं कि सिपाही ने आशा की ओर से की गई अभद्रता भी उसमें लिखवाई है।
यूनीफॉर्म में भी नहीं थी आशा
आशा जबरन अस्पताल के अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी। वह अपने चार मरीजों के नाम नहीं पड़ने की बात कह कर अंदर आना चाह रही थी। आशाओं का अस्पताल में प्रवेश कोरोना वायरस फैलने की आशंका के कारण बंद किया गया है। बहस हुई है। आशा के पैर में पुरानी चोट लगी है। आशा यूनीफॉर्म में भी नहीं थी। परिचय भी सिपाही को नहीं दिया। सिपाही पर पिटाई के आरोप निराधार है।
- डॉ. सुषमा कर्णवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
आरोप बेबुनियाद
आशा बिना यूनीफॉर्म के थी। परिचय भी नहीं दिया और अंदर घुस रही थी। मैंने उसे अंदर जाने से रोका। इस पर आशा भड़क उठी। डंडा छीनकर धक्का दे दिया। बच गई नहीं तो गेट से गुजर रही एंबुलेंस में टकरा जाती। इसके बाद दबाव बनाने और मामले को तूल देने के लिए आशा गेट पर लेटकर हंगामा करने लगी। पिटाई का आरोप लगाया है जो बेबुनियाद है।
- डॉली रानी , सिपाही