रामपुर मथुरा (सीतापुर)। सरयू नदी के जलस्तर में दो दिन से लगातार कमी आ रही है। सोमवार को 40 सेमी घटकर जलस्तर 118.10 मीटर पर पहुंच गया। खतरे के निशान से पानी अब 90 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर कम होते ही कटान शुरू हो गई है। कैलाश पुरवा के करीब सरयू की कटान करती लहरें 15 बीघा खेतों को फसल समेत बहा ले गई हैं। कटान को लेकर लोग भयभीत हैं। वहीं, तीनों बैराजों से सोमवार को 3.37 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
गिरिजापुरी के तीनों बैराजों से कम पानी डिस्चार्ज किए जाने का यह असर रहा कि सरयू के तटवर्ती क्षेत्र में खेतों व गांवों के आसपास भरा बाढ़ का पानी घटने लगा है। हांलाकि, अभी स्थितियां पूरी तरह से सामान्य नहीं हुई हैं। पानी कम जरूर पड़ा है, लेकिन निचले हिस्सों में अभी भरा होने और जहां से निकला है वहां कीचड़ के कारण लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। बाढ़ से राहत की उम्मीद जगी तो कटान शुरू हो गई। कैलाश पुरवा के सुदर्शन की ढाई बीघा, मदन की चार बीघा, पारस की साढ़े तीन बीघा तथा शंकर की पांच बीघा कृषि योग्य जमीन कटकर सरयू नदी में बह गई है।
अंगरौरा निवासी मिश्री, बुधनी, मुन्नू, पुत्ती, बृजलाल, रघुनाथ, रत्ती लाल, गोगे, पिंटू व प्यारे पुरवा में मनीराम, फूलचंद, शंकर, कीड़ी सत्यवान, गजराज व टहलू तथा बाबाकुटी के रमदेई, खेलावन, बच्चू व बालकिशुन के घरों से पानी निकल गया है। कीचड़ के कारण अभी यह बाढ़ पीड़ित घर वापस नहीं लौट पाए हैं। इनमें से कई लोग अब भी अखरी के पास तटबंध पर शरण लिए हैं। पानी निकलने के बाद प्यारेपुरवा, निरंजन पुरवा, अंगरौरा व बाबाकुटी गावों को जाने वाली सड़कों पर कीचड़ है। इससे आवागमन फिलहाल प्रभावित है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा बैराज- 1,34,435 क्यूसेक
शारदा बैराज- 1,42,466 क्यूसेक
बनबसा बैराज- 60,126 क्यूसेक
सर्वे के बाद दिलाई जाएगी सहायता राशि
सरयू नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है। हालात बहुत तेजी से सामान्य हो रहे हैं। गावों से पानी निकल गया है। जिन किसानों की फसल का नुकसान हुआ है व जमीन कटी है, उनका सर्वे करवाकर सहायता राशि दी जाएगी।
- अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद
परियोजना के करीब कटान
तंबौर (सीतापुर)। शारदा नदी का जलस्तर तेजी से घटा है। बसंतापुर कोल्हूपुरवा के बीच क्षतिग्रस्त हुए बाढ़ राहत परियोजना के पास शारदा नदी ने कटान शुरू कर दिया है। लखनीपुर गांव में भी धीमी गति से कटान हो रहा है। बसंतापुर में बीते 6 अगस्त को इसी स्थान से पानी निकल कर आबादी क्षेत्र में पहुंचा था। ग्रामीण पंकज सिंह, संजय गुप्ता, रामसेवक, हीरा सिंह, सुनील, विमलेश, सर्वेश कुमार,विजय, कुमार सिंह, शिवकुमार आदि ने बताया की बसंतापुर गांव में लगभग 2200 आबादी है। यदि बचाव कार्य क्षतिग्रस्त हुआ समूचा गांव खतरे में पड़ जाएगा।
बारिश और बादल गांजर वासियों को डरा रहे
रेउसा (सीतापुर)। बैराजों से कम पानी छोड़े जाने से सरयू व शारदा नदियों का जलस्तर घट रहा है। इससे तटवर्ती बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। हांलाकि, खेतों और रास्तों पर अब तक पानी भरा है। वहीं, सोमवार को मौसम में बदलाव के बाद बारिश होने से नदियों में फिर उफान की आशंका को लेकर लोग भयभीत हैं। बाढ़ के पानी से मेवड़ी छोलहा के श्रीराम पुरवा, गोडियन पुरवा, धूसे पुरवा, लोधन पुरवा, गवलोक के गार्गी पुरवा, पासिन पुरवा, दुर्गा पुरवा, सम्बारी पुरवा, राम लाल, आसा राम, दर्जिन रेती, जंगल टपरी, नगीना, मरैली आदि करीब 20 गांव घिर गए थे। इन गांवों के आसपास भरा बाढ़ का पानी नदियों का जलस्तर घटने से निकल रहा है। हांलाकि, अभी पूरी तरह से हालात सामान्य नहीं हुए हैं। क्षेत्रीय लेखपाल राकेश यादव ने बताया कि श्रीराम पुरवा के करीब क्षतिग्रस्त बाढ़ राहत परियोजना पर बोरियां डालने का कार्य शुरू कर दिया गया है।