सकरन विकास खंड के अधिकांश स्कूलों की सूरत बदरंग हो चुकी है। कारण यह है कि स्कूलों की रंगाई-पुताई नहीं कराई गई है। जबकि स्कूलों में अप्रैल माह में बजट भेजा जा चुका है। इसके बावजूद प्रधानाध्यापकों ने लापरवाही बरती।
जिम्मेदारों ने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। जिससे नौनिहालों को स्कूल में साफ-सुथरा माहौल नहीं मिल पा रहा है।
परिषदीय स्कूलों में नौनिहालों को साफ-सुथरा माहौल मिले व स्वच्छ वातावरण में भोजन बने, जिससे नौनिहालों का मन पढ़ाई में लगे।
इसके लिए स्कूलों की प्रतिवर्ष रंगाई-पुताई कराई जाती है। कमरों से लेकर किचन तक एक रंग में रंगे जाते हैं। प्रति स्कूल पांच हजार रुपये का बजट मुहैया कराया जाता है। इस बजट से स्कूलों की सूरत निखारी जाती है।
प्रत्येक वर्ष शैक्षिक सत्र प्रांरभ होने के लगभग एक माह बाद बजट आ जाता है। अप्रैल माह में स्कूलों को बजट रिलीज कर दिया गया था। इससे मई व जून माह में रंगाई-पुताई का काम पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे।
प्रधानाध्यापकों पर यह निर्देश बेअसर रहे। उन्होंने सूरत बदलने में लापरवाही बरती। जिसकी वजह से दीवारों से प्लास्टर छूट रहा है। उन पर काई व मिट्टी जमा हो गई है। जिससे नौनिहालों को स्वच्छ माहौल नहीं मिल पा रहा है।