अधिकांश स्वास्थ्य उपकेंद्रों का यही हाल है। स्वास्थ्य कार्यकत्री के भवन में न बैठने से इनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण कब्जा जमाकर अपने घरेलू कामों में प्रयोग कर रहे है।
ऐसे में लोगों को टीकाकरण व अन्य सुविधाओं के लिए सीएचसी की ओर रुख करना पड़ता है। बच्चों का टीकाकरण व गर्भवती महिलाओं का गांव में ही नियमित चेकअप कराने के उदेद्श्य से लाखों की लागत से स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाए गए हैं।
इन केंद्रों पर स्वास्थ्य कार्यकत्री के माध्यम से सेवाएं दी जाती हैं। पिसावां इलाके में 24 सेंटर बने हुए हैं। जिसमें 17 अपने भवन में चल रहे हैं। जबकि सात किराए के भवन में संचालित है।
ग्रामीणों के मुताबिक सेंटराें पर स्वास्थ्य कार्यकत्री नहीं बैठती हैं। कभी कभार गांव आती हैं तो वह दूसरी जगह पर बैठकर चली जाती हैं।
इससे टीकाकरण प्रभावित होता है। चेकअप व अन्य सुविधाओं के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिसावां जाना पड़ता है। ऐसे में लाखों की लागत से बने भवन निष्प्रयोज्य साबित हो रहे है। उनका लाभ ग्रामीणों को नही मिल पा रहा है।