अब नौनिहालों के साथ गुरुजी को भी परीक्षा की कसौटी पर खरा उतरना होगा। जिसके जरिए उनको अपनी कार्यकुशलता प्रदर्शित करनी होगी। अन्यथा गुणवत्ता विहीन स्कूल पर लाल निशान लगा दिया जाएगा। जो गुरुजी की सर्विस बुक पर बैड इंट्री के लिए पर्याप्त होगा।
इससे उनके पदोन्नति सहित अन्य भत्तों पर असर पड़ेगा। यह कवायद शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शुरू की जा रही है। इसकी रिपोर्टिंग शासन स्तर पर की जाएगी। इस संबंध में शासन ने निर्देश जारी किए हैं।
परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों का समुचित विकास हो सकेे। इसके लिए शासन की तरफ से उनको निशुल्क किताबें, यूनीफॉर्म, भोजन सहित अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। फिर भी शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
आमतौर पर शिक्षक खराब गुणवत्ता का ठीकरा बच्चों की लापरवाही व शासन की नीतियों पर फोड़ देते हैं। इससे बच्चों का विकास नहीं हो पा रहा है। चालू शैक्षिक सत्र गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष गुणवत्ता बढ़ाने के तमाम प्रयास भी किए जा रहे हैं।
बेसिक शिक्षा निदेशक ने परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के लिए विद्यालयों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया है। अब गुरुजी को पूरी तन्मयता के साथ स्कूल आकर पढ़ाना होगा।
शिक्षा के उच्चाधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के समय विद्यालय का वातावरण, बच्चों का ड्रेस मेंटीनेंस , कॉपी किताबों के रख-रखाव के अलावा विद्यार्थी के शैक्षिक स्तर का आकलन किया जाएगा। इनमें किसी भी मानक का अनुकूल परिणाम न मिलने पर संबंधित शिक्षक पर गाज गिरनी तय है।
निरीक्षण में शिक्षाधिकारी द्वारा ए, बी व सी ग्रेड दिया जाएगा। इसके आधार पर ही शिक्षकों के प्रमोशन व अन्य भत्ते निर्भर होंगे। जांच के बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी इसकी रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपेंगे। वहीं से रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी।