सीतापुर। पश्चिमी विक्षोभ के कारण होने वाली बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे बचाव करने की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के अध्यक्ष डॉ दया एस श्रीवास्तव ने किसानों को दी। इसके लिए केंद्र के आसपास के गांवों के प्रगतिशील किसानों की बैठक की।
केवीके कटिया के अध्यक्ष डॉ. दया एस श्रीवास्तव ने किसानों को बताया कि यदि गेहूं की फसल पकने की अवस्था में है और तेज हवा के साथ बारिश होती है, तो पौधे जमीन पर गिर जाते हैं। इससे दानों की गुणवत्ता खराब होती है और पैदावार घट जाती है।
इसके लिए मौसम विभाग की चेतावनी मिलते ही खेतों में सिंचाई तुरंत बंद कर दें। गीली मिट्टी में तेज हवा चलने पर फसल जल्दी गिरती है।
यदि खेत में पानी भर जाए, तो उसे निकालने के लिए नालियां बनाएं। जमा हुआ पानी जड़ों को कमजोर कर देता है। अधिक नमी के कारण गेहूं के दानों पर फफूंद लग सकती है, जिससे दाने काले पड़ जाते हैं और उनकी बाजार में चमक कम हो जाती है।
बारिश के बाद धूप निकलने पर फसल का निरीक्षण करें। यदि पीला रतुआ के लक्षण दिखें, तो विशेषज्ञ की सलाह से प्रोपिकोनाजोल का छिड़काव करें। यदि फसल पक चुकी है, तो उसे काटकर सुरक्षित स्थान पर रखें। कटी हुई फसल को तिरपाल से ढक कर रखें ताकि दाने भीगने से बच सकें।