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कोरोना की दूसरी लहर का डर, प्रवासी फिर से लौटने लगे घर

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केस-1
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भेज दिया घर
सिधौली क्षेत्र के महारानी खेड़ा निवासी जीवनलाल बताते हैं कि वह लॉकडाउन खुलने के बाद नोएडा की एक फैक्ट्ररी में काम करने के लिए चले गए थे। दोबारा महामारी फैलने को लेकर वहां से हमें यह कहकर नौकरी से निकाल दिया कि कोरोना का खतरा है घर चले जाओ कुछ माह बाद फिर बुला लेंगे।
केस-2
मालिक ने निकाला
गोधना गांव निवासी इमरान अली बताते हैं कि पंजाब के लुधियाना में एक ऑटो पार्टस कंपनी में काम करता था। पहले की अपेक्षा इस बार कोरोना वायरस के बाद बढ़िया काम चल रहा था, पर अचानक कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने से मालिक ने तमाम कर्मचारियों को घर जाने की बात कह छुट्टी कर दी है।
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केस-3
एक माह की दी एडवांस तनख्वाह
बाड़ी गांव निवासी समसुल का कहना है कि वह सूरत में रहकर साड़ी का काम करते थे। दोबारा कोरोना बीमारी आते ही संक्रमण को फैलते देख मालिक ने कहा घर में रहकर बीमारी से बचने के लिए एक माह का एडवांस तनख्वाह देते हुए कहा कि कोई जरूरत पड़े तो कॉल कर लेना।
सिधौली (सीतापुर)। कोरोना की दूसरी लहर ने गैर राज्यों में रोजी रोटी की तलाश में गए कामगारों पर प्रतिकूल असर दिखाना शुरू कर दिया है। कोरोना काल के इस साइड इफेक्ट के चलते दिल्ली, मुंबई, महाराष्ट्र, गुजरात में काम काज को गए प्रदेस के प्रवासी तेजी से घर वापस लौटने लगे हैं। कोई नौकरी चले जाने तो कई को जबरदस्ती छुट्टी देकर घर भेजा जा रहा है।
ऐसे में इन परिवारों के सामने अब रोजी रोटी का संकट भी गहराने लगा है। कोरोना की दूसरी लहर से सर्वाधिक प्रभावित दिल्ली, मुंबई, गुजरात में बड़ी तादात में जिले के लोग काम करते हैं। पहली लहर के बाद यह लोग नवंबर में इन राज्यों में फिर से काम करने को इस उम्मीद के साथ वापस गए थे कि कोरोना के कारण हुए नुकसान की भरपाई कर लेंगे, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने इस मंसूबे पर पानी फेर दिया है।
बिगड़ते हालात के कारण भले ही औद्योगिक इकाईयों को बंद नही किया गया है लेकिन संक्रमण के फैलाव को देखते को देखते हुए कामकाज सिमटने लगा है। बीते साल लॉक डाउन के दौरान घर वापसी को लेकर तमाम दुश्वारियां झेल चुके प्रवासी इस बार परेशानी से बचने को समय रहते ही घर वापसी में जुटने लगे हैं।
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इन प्रवासियों को फैक्ट्ररी मालिक कहीं एडवांस देकर घर भेज रहे है तो कही इनकी सेलरी दबा दे रहे है। हालात सामान्य होने पर फिर से काम पर वापस बुलाने की बात कह रहे है। इससे प्रवासी बहुत ही परेशान है। अब उनके सामने एक बार फिर से रोजी रोटी का संकट मंडराने लगा है।
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