बेलगाम अधिकारी अब मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले कार्यों में भी रुचि नहीं ले रहे हैं। विकास की इस सुस्ती से जिले के ग्रेडिंग में गिरावट आ गई है। जनवरी माह में सीएम की प्राथमिकता वाले 42 कार्यक्रमों की समीक्षा में जनपद के 12 विभागों से संचालित कार्यक्रमों को ‘डी’ ग्रेड मिला है।
सभी विकास कार्यों का परसेंटेज शून्य से चार फीसदी तक रहा। ग्रेडिंग में लगातार कमी आने से जिले के हॉकिम भी बेहद परेशान हैं। डीएम ने इन 12 विभागों के अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार के उच्च प्राथमिकता प्राप्त विकास कार्यक्रमों की प्रगति जिले में बेहद खराब है।
सोलर फोटो वोल्टैइक इरीगेशन पंपों की स्थापना कार्य, एकीकृत बागवानी विकास मिशन (राष्ट्रीय बागवानी मिशन, राज्य वित्त पोषित एवं अन्य) मल्टी सेक्टोरल डवलपमेंट प्लान के तहत कार्यों की प्रगति शून्य है। इसके अलावा राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत उच्चीकृत ग्राम एवं मजरों का कुल लक्ष्य के सापेक्ष जनवरी माह में 3.76 फीसदी काम कराया जा सका है।
जबकि पारदर्शी किसान योजना में लक्ष्य के सापेक्ष 16.07 फीसदी कृषकों को ही लाभान्वित किया जा सका है। स्वास्थ्य महकमे के सभी निर्माण कार्यों की प्रगति भी सुस्त है। लक्ष्य के सापेक्ष 43.93 फीसदी काम ही कराया गया है।
इसी तरह कर एवं करेत्तर राजस्व संग्रह, पेयजल मिशन, आजीविका मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत बेघरों के लिए आश्रम योजना में कॉलोनी निर्माण योजना की प्रगति भी बेहद खराब है।
इनके अलावा इंदिरा आवास, भू-मानचित्र डिजीटलाइलेशन, एनआरएचएम के तहत 200, 100 व 50 बेड मैटरनिटीविंग, मल्टी सेक्टोरेल डवलपमेंट, एकीकृत बागवानी विकास मिशन तुड़ाई प्रबंध में प्रगति शून्य पाई गई। यही वजह है कि इन योजनाओं के कार्यों की प्रगति सिफर है।
इन विभागों के अफसर औसत रफ्तार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। जनपदों में विकास की समीक्षा में शासन को सीतापुर का हाल खराब मिला है। समीक्षा के दौरान जनपदों की सूची में सीतापुर सबसे निचले पायदान पर पाया गया है। इससे पहले जुलाई 2015 में जिला ए-ग्रेड में था।