सीतापुर। उनके गुजर-बसर का आसरा सरकार से मिलने वाली विधवा पेंशन है। पर सरकारी व्यवस्था में खामी की वजह से उन्हे पेंशन नहीं मिल पा रही है। दिवाली का त्योहार आ गया। उनके हाथ खाली हैं। ऐसे में वह दिवाली कैसे मनाएं। यह सवाल मुंह बाए उनके सामने खड़ा है। पिछले कई दिनों से पेंशन के लिए तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर लगा रही हैं। लेकिन पेंशन की टेंशन कम नहीं हुई। ऊपर दिए गए केस तो बानगी भर हैं। कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के सामने स्थित जिला प्रोबेशन के दफ्तर में सैकड़ों बेवाएं प्रतिदिन देखी जा सकती हैं। जिनके खातों में पेंशन नहीं पहुंच रही है। वह अपनी फरियाद अफसरों से करती हैं। ज्यादा परेशान होने पर डीएम से मिलकर दुखड़ा सुनाती हैं। डीएम अपने मातहतों को समस्या के निदान के निर्देश जारी कर देते हैं। फरियादी बेवाएं इधर से उधर अफसरों के चक्कर काटती रहती हैं। मगर उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। यही नहीं तहसील दिवस में पेंशन न मिलने की दर्ज शिकायतों का भी विभाग द्वारा निस्तारण कर दिया जाता है। जिसमें लाभार्थी के संतुष्ट होने की बात कही जाती है। लेकिन वास्तविकता इससे परे है। निस्तारित शिकायतों के लाभार्थी आज भी प्रोबेशन कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।