सीतापुर। लखनऊ और लखीमपुर-खीरी के बाद सीतापुर के पुलिस महकमे में भी सरकारी धन की हेराफेरी पकड़ी गई। पुलिस विभाग से जुड़े करीब 50 कर्मचारियों के खाते में 10 लाख से अधिक कैश गलत तरीके से जमा कराया गया है। विभागीय ऑडिट में इसका खुलासा होने के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मचा है। इस करतूत के पीछे जिस बाबू का हाथ माना जा रहा है वह पहले ही यहां से स्थानांतरित हो चुका है। इस घपलेबाजी को दबाए रखने के लिए अब संबंधित कर्मचारियों से गुपचुप तरीके से रकम वापस लेने की तैयारी की जा रही है। इससे संबंधित कर्मचारी हलाकान है।
पुलिस महकमे की विभागीय सूत्रों के मुताबिक पुलिस विभाग के करीब 91 फालोअर में से 50 के खातों में छठा वेतन आयोग लागू होने के बाद मिले एरियर की धनराशि के साथ ही उनके प्रत्येक के खातों में अधिकतम 70 हजार तक अधिक धनराशि भेज दी गई। फालोअर के खातों में भेजी गई यह रकम करीब 10 लाख रुपये है। खातों में रकम जाने के बाद तमाम फालोअर ने उसे अपने तरीके से खर्च कर दिया। लोकसभा चुनाव पूर्व जब विभागीय ऑडिट हुआ तो सरकारी धनराशि में किए गए खेल का मामला पकड़ में आया। मामला प्रकाश में आने बाद विभाग के संबंधित कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। धीरे-धीरे यह जानकारी उन फालोअर को हुई, जिनमें खातों में यह रकम भेज दी गई थी। इस पर संबंधित फालोअर भी सन्न रह गए। संबंधित लिपिक के साथ ही उन लोगों को भी इस घपलेबाजी में फंसने का डर सताने लगा। जिसके बाद करीब छह फालोअर ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ. तहसीलदार सिंह से मुलाकात की और उन्हें उक्त गड़बड़ी की सूचना दी। यह सूचना मिलते ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक भी सकते में आए गए। उन्होंने फौरन मामले की जांच कराने की बात की। लेकिन उनका तबादला होने के बाद मामला ठंडा पड़ गया।
हालांकि अंदर खाने संबंधित कर्मचारी- फालोअर के खातों में गई ज्यादा रकम वापसी की तैयारी कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि फालोअर के खातों में अधिक रकम भेजने के एवज में संबंधित बाबू ने भी आर्थिक लाभ उठाया। माना जा रहा है कि यदि गहनता से पूरे मामले जांच कराई जाए तो विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। प्रकरण से जुड़े बाबू रमेश का गैर जनपद स्थानांतरण भी हो गया है। हालांकि विभागीय अधिकारी एक तरफ इसको मानवीय त्रुटि मान रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पूरे मामले की जांच कराए जाने की बात भी कह रहे हैं।