कमलापुर (सीतापुर)। कमलापुर इलाके में इस बार प्रवासी पक्षियों का कलरव सुनाई नहीं पड़ रहा है। इससे क्षेत्र के लोग भी मायूस हैं। जानकार बताते हैं कि झीलों की हालत बदरंग होने से पक्षियों ने इस बार यहां प्रवास नहीं बनाया है। झीलों में पानी कम होना भी एक बड़ी वजह है। वहीं कुछ शिकारी पक्षियों का शिकार करने के इरादे से झीलों के इर्दगिर्द की घास में जहर घोल देते हैं। इस वजह से भी प्रवासी पक्षियों ने यहां डेरा नहीं डाला।
कसमंडा ब्लॉक के ज्योतिशाह आलमपुर और महेंद्र झीलों में हर साल सर्दियों का मौसम शुरू होते ही विदेशी पक्षी आने लगते थे। दिसंबर तक इन पक्षियों की तादाद काफी बढ़ जाती थी। विदेशी पक्षियों के कलरव से आसपास का वातावरण भी सुंदर लगता था। तत्कालीन डीएम संजय कुमार ने झीलों के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया था। सौंदर्यीकरण में झीलों की सफाई व उसके किनारों पर पौधरोपण तथा बंधा निर्माण के साथ-साथ वाच टॉवर भी बनवाए थे। इससे यहां पक्षियों की संख्या भी बढ़ी थी। उनके स्थानांतरण के बाद यहां अब न तो पौध रहे और न ही वाच टॉवर। झीलें भी गंदगी से पट गई हैं। वहीं जलकुंभी ज्यादा होने से पानी भी लगातार कम हो रहा है। झीलों में गंदगी से विदेशी पक्षियों की संख्या काफी कम हो गई है। जनवरी में भी पक्षियों के बिना झीलें सूनी पड़ी हैं। ग्रामीणों की मानें तो कभी इन झीलों में झुंड के रूप में पक्षी आते थे। पक्षियों के कलरव से आसमान गूंजता था, पर इस बार कुछ नहीं है। पक्षियों के न आने से पर्यावरण प्रेमी मायूस हैं। झीलों के किनारों पर रोपे गए पौधे भी समाप्त हो गए हैं। ज्योतिशाह आलमपुर के प्रधान कौशल यादव का कहना है कि झीलों को पक्षी विहार के रूप में विकसित करने का जो वीड़ा तत्कालीन डीएम ने उठाया था। उनके तबादले के बाद अन्य अधिकारियों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। ग्रामीण प्रदीप यादव, राम स्वरूप, मन्ना लाल आदि बताते हैं कि झीलों की हालत काफी खराब है। उन्होंने बताया कि एक तो झीलें बदहाल हैं तो दूसरे झीलों पर आने वाले प्रवासी पक्षियों का शिकार भी नहीं रुक रहा है। यहां आने वाले पक्षी अपना प्रजनन काल पूरा करने के बाद ठंड खत्म होते ही लौट जाते थे लेकिन इस बार पक्षी नहीं आए।