सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार सिंह ने पत्नी की हत्या के दुष्प्रेरण के लिए मृतका के पति को सात वर्ष के कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। नामजद तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी रमाकांत राजवंशी ने की।
लल्लू के मुताबिक उसने अपनी पुत्री पुष्पा की शादी पिसावां थाना क्षेत्र के ग्राम वजीरनगर निवासी प्रमोद कुमार के साथ पांच जून 2009 को की थी। जिसमें उपहार स्वरूप उसने काफी सामान दिया था। पर पुष्पा की ससुराल वाले मोटरसाइकिल, भैंस, मोबाइल व बीस हजार रुपये मांग रहे थे। आर्थिक दिक्कतों के चलते दहेज की मांग पूरी न की जा सकी। 14 मई 2010 की शाम करीब सात बजे वादी को सूचना मिली कि उसकी लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। जब वह बेटी ससुराल पहुंचा तो परिवारीजन घर से भाग चुके थे। बेटी के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। इस मामले में न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज हुई। विवेचक ने पति प्रमोद, उसके भाई अनूप, पिता कल्लू व मां सावित्री के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सबूतों के आधार पर प्रमोद को पुष्पा की हत्या के दुष्प्रेरण के लिए दोषी पाया गया। न्यायाधीश ने अनूप, कल्लू व सावित्री को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।