जिले में 242 वित्तविहीन माध्यमिक कॉलेज हैं। इन कॉलेजों के शिक्षक लंबे अरसे से मानदेय की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वह जिला मुख्यालय से लेकर विधानसभा तक का घेराव कर चुके हैं। जिस पर शासन ने शिक्षकों का जनशक्ति निर्धारण करने का फैसला किया था।
इसके लिए कॉलेजों से अपने यहां कार्यरत शिक्षकों का 12 बिंदुओं पर ब्यौरा मांगा था। इस ब्यौरे को सभी कॉलेजों ने उपलब्ध करा दिया है। उसके बाद शासन ने अगले चरण में शिक्षकों के जातिगत (सामान्य, अनुसूचित जाति, जन जाति व ओबीसी) का ब्यौरा मांगा है।
जिस पर डीआईओएस ने 14 अगस्त 2015 तक सभी कॉलेजों को जानकारी देने के निर्देश दिए थे। इस अवधि तक केवल 20 कॉलेजों ने ही जानकारी दी। जिस पर अन्य कॉलेजों को नोटिस जारी की गई थी, जिसमें 30 सितंबर तक जानकारी उपलब्ध कराने की हिदायत दी गई है। इस दौरान केवल 150 कॉलेजों ने ही जानकारी उपलब्ध कराई है।