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वैज्ञानिक तरीके से होगा वर्षा जल का कंट्रोल

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ब्लॉकों में बनेंगे पक्के चेकडैम, दूर होगी ड्रेनेज समस्या
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सीतापुर। मानसूनी बारिश का पानी अब बर्बाद नहीं होगा। इस पानी को वैज्ञानिक ढंग से सहेजा जाएगा। इसके लिए जिले में पक्के चेकडैम बनाए गए जाएंगे। तालाब एवं पोखरों का नवीनीकरण होगा। इससे वाटर हार्वेस्टिंग तो होगी, ड्रेनेज समस्या का भी समाधान हो जाएगा।

शासन के फरमान पर भूमि संरक्षण विभाग वर्षा जल को सहेजने के लिए खाका तैयार करने में जुट गया है। यह कार्ययोजना अमल में आते ही किसानों को राहत देगी। इससे करीब 12 सौ किसान फायदा मिलेगा।
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मालूम हो कि बारिश के पानी को सही ढंग से नियंत्रित न करने के कारण किसानों का बहुत नुकसान होता है। गांवों के प्राकृतिक नाले अवरुद्ध हो जाने से वर्षा ऋतु में बारिश का जल अनियंत्रित होकर बाढ़ के रूप में खेतों में होकर बहता है।

इससे फसल जलमग्न होने के कारण कृषि उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है। इसका समाधान करने के लिए भूमि संरक्षण विभाग बारिश के पानी का वैज्ञानिक तरीके उपचार करेगा। जलनिकासी के लिए नाले खुदेंगे। पुराने नालों को नया रूप दिया जाएगा।

नाले के तट की ढाल को नियंत्रित रखने के लिए जगह-जगह पक्के चकडैम बनाए जाएंगे। इसी प्रकार पोखरों व छोटी नदियों की तलहटी का भी जीर्णोद्धार करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग की जाएगी। इसमें मनरेगा का भी धन लगेगा।

सात सौ हेक्टेअर जमीन होगी शोधित
शासन के निर्देश पर भूमि संरक्षण इकाई सीतापुर ने जिले के तीन ब्लॉकों क्रमश: मिश्रिख, गोदलामऊ, सिधौली में कायाकल्प कोअमली जामा पहनाने के लिए कार्ययोजना बनाई है। इन ब्लॉकों के 590 हेक्टेअर भूमि को योजना के तहत लिया गया है। इससे लगभग एक हजार किसान लाभान्वित होंगे।
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इसी प्रकार भूमि संरक्षण इकाई महोली ने ब्लॉक पिसांवा के 100 हेक्टेअर रकबे में कार्य कराने की योजना बनाई है। इससे दो सौ किसानों को लाभ मिलेगा। योजना के तहत चेकडैम, मिट्टी के काम, ड्रेनेज व वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य होंगे।

जिले के तीन ब्लॉकों में कार्य कराने के लिए बनी कार्ययोजना को स्वीकृति के लिए उप निदेशक भूमि संरक्षण को भेजा गया है।
-राजित राम, भूमि संरक्षण अधिकारी सीतापुर।
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