जिला अस्पताल में दवाओं की किल्लत, दो माह से नहीं आया बजट
सीतापुर। जिला अस्पताल इस समय उधारी की दवा के सहारे चल रहा है। कारण यह है कि शासन से करीब दो माह से बजट नहीं आया है। इससे लोकल खरीद करके मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं। लेकिन यह दवाएं डिमांड के मुताबिक नहीं हैं।
जिसमें सबसे अधिक दिक्कत पैरासिटामॉल टेबलेट को लेकर है। वर्तमान में इस टैबलेट की सबसे अधिक जरुरत है। ऐसे में यह मुख्य भंडार कक्ष से वितरित की जा रही है। ऐसे ही अन्य कई बीमारियों की दवाओं की किल्लत बनी हुई है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में वैसे तो रोजाना औसतन करीब तीन हजार मरीज आते थे। लेकिन इस बदलते मौसम में यह आंकड़ा चार हजार को पार कर गया है। ऐसे में दवा की डिमांड बढ़ गई है। जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई दवाएं करीब दो माह पहले ही स्टॉक से समाप्त हो चुकी हैं।
शासन स्तर से इनकी आपूर्ति ठप चल रही है। इसकी कई बार शिकायत भी दर्ज कराई जा चुकी है। फिर भी आपूर्ति नहीं हो रही है। इस समय अस्पताल में जुखाम, खांसी, बुखार के अधिक केस आ रहे हैं। ऐसे में इन मरीजों को पैरासिटामॉल की टेबलेट दी जाती है। लेकिन इसका स्टॉक समाप्त हो चुका है। जब आपूर्ति नहीं हुई तो व्यवस्था बिगड़ने लगी।
इस पर लोकल पर्चेज करके करीब एक लाख की पैरासिटामॉल टेबलेट खरीदी गई है। लेकिन यह डिमांड के मुताबिक बहुत कम ही है। ऐसे में इसका वितरण औषधि भंडार से न करके केवल मुख्य औषधि भंडार से किया जा रहा है। इससे मरीजों को जरुरत के मुताबिक दवा नहीं मिल पा रही है। अगर किसी मरीज को पांच टेबलेट की जरुरत है तो उसे दो या तीन ही दी जा रही है।
30 फीसदी से अधिक नहीं कर सकते लोकल खरीद
जिला अस्पताल को सीधे शासन स्तर से दवा मिलती है। वहीं लोकल खरीद के लिए बजट दिया जाता है। लेकिन इस समय न तो दवा है न ही बजट। ऐसे में उधारी की दवा खरीदकर मरीजों को दी जा रही है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगर डिमांड के मुताबिक दवाएं खरीद लें तो आगे आडिट में दिक्कत आती है तब 30 फीसदी का हवाला दिया जाता है। जब दवा नहीं है तो मरीजों की सहूलियत को देखते हुए लोकल खरीद की जा रही है। लेकिन यह डिमांड के मुताबिक नहीं कर सकते हैं।
अप्रैल से अब तक खरीदी गई छह लाख की दवा
जिला अस्पताल में लोकल पर्चेज की स्थिति भी खराब है। अगर पिछले साल की बात की जाए तो करीब 25 लाख रुपया बकाया चल रहा है। इसी तरह इस साल अप्रैल से अब तक करीब छह लाख की दवा खरीदी जा चुकी है। यह सब उधारी के जरिए चलाया जा रहा है। अगर जल्द बजट नहीं मिला तो स्थित और भयावह हो जाएगी।
एक माह में करीब 15 लाख की दवा की होती खपत
जिला अस्पताल में करीब 15 लाख की प्रतिमाह दवा की खपत होती है। यह सब मरीजों की दिन प्रतिदिन बढ़ रही संख्या को देखते हुए हो रहा है। लेकिन डिमांड के मुताबिक बजट नहीं मिल रहा है। आए दिन उच्चाधिकारियों के दौरे के समय भी अस्पताल प्रशासन शिकायत करता रहता है। फिर भी जरुरत पूरी नहीं हो रही है।
सीएमओ व जिला मलेरिया अधिकारी ने नहीं दी दवा
सीएमएस ने मलेरिया की दवा प्राइमाक्वीन की उपलब्धता को लेकर सीएमओ व जिला मलेरिया अधिकारी को पत्र लिखा था। जिसके जरिए दवा देने की बात कही थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मलेरिया की दवा जिला मलेरिया अधिकारी को देनी होती है। लेकिन इन्होंने अब तक कोई दवा नहीं दी है। इससे इस दवा को भी खरीदना पड़ रहा है।
वर्जन
अखर रही बजट की कमी
शासन से बजट नहीं मिलने से दिक्कत आ रही है। लोकल स्तर पर दवाओं की खरीद कर काम चलाया जा रहा है। बजट मिलते ही समस्या दूर हो जाएगी।
-डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल