गोंदलामऊ ब्लॉक में आक्रोशित ग्रामीण करने लगे पलायन, एसडीएम ने आश्वासन देकर मनाया
औरंगाबाद/सीतापुर। गोंदलामऊ विकासखंड में बुखार से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को बुखार की चपेट में आकर छह लोगों की मौत हो गई। इन मौतों से आक्रोशित ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गांव से पलायन शुरू कर दिया।
एसडीएम व एडी ने ग्रामीणों को हरसंभव इलाज की व्यवस्था कराने का आश्वासन देकर शांत कराया। वहीं इलाके में 100 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। औरंगाबाद में लगातार बुखार से मौतें हो रही हैं। फिर भी जिला प्रशासन की नींद टूट नहीं रही है। वह केवल मौत होने का सिलसिला देख रहा है।
सोमवार को पीतपुर निवासी रामपाल (60) कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे। पहले इन्होंने गांव आई टीम से दवाएं लीं। लेकिन फायदा नहीं हुआ। सोमवार को इनकी मौत हो गई। सैदापुर निवासी विमला (45) चार दिन से बुखार से परेशान चल रही थी। इलाज के दौरान इनकी मौत हो गई।
समासी निवासी महादेवी (65) पिछले पांच दिन से बुखार से तड़प रही थी। जब गांव आई टीम से दवा लेने से फायदा नहीं हुआ तो इन्होंने प्राइवेट में इलाज कराया। इस दौरान मौत हो गई। डेंगरा निवासी सीमांक (3) कई दिनों से बुखार का इलाज करा रहेे थे। जांच भी कराई। लेकिन डॉक्टर सही मर्ज नहीं पकड़ सके। सोमवार को इसकी मौत हो गई।
वहीं अकबरपुर निवासी रोली (14) कई दिनों से बुखार के बाद मौत के गाल में समा गई। निजामपुर निवासी सुजीत कुमार (10) सरकारी व प्राइवेट चिकित्सालयों में इलाज के बाद फायदा नहीं हुआ। आखिर में इनकी भी मौत हो गई। वहीं इन गांवों में 100 से अधिक लोग बुखार की चपेट में है।
इधर, गांवों में मौतों का सिलसिला न थमते देख ग्रामीण आक्रोशित हो गए। सोमवार को सुबह नटवलग्रंट से नंदकिशोर, आदित्य, शिवराज, गौतम, राजेश कुमार, भगवानबक्स, अवधेश कुमार, राजकुमारी आदि ने पलायन शुरू कर दिया। इनका कहना था कि इस गांव में अब तक नौ लोग मर चुके हैं।
न तो स्वास्थ्य विभाग ध्यान दे रहा है न ही जिला प्रशासन। पेयजल की दिक्कत बताई जा रही है लेकिन इसे आज तक दूर नहीं किया जा सका है। इसकी खबर मिलते ही प्रशासन के हाथपांव फूल गए। एडी लखनऊ डॉ. अतुल कुमार मिश्रा व एसडीएम राजीव पांडेय गांव पहुंचे।
उन्होंने ग्रामीणों को पूरा इलाज व पूरी मदद करने का आश्वासन देकर शांत कराया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर चार दिन के अंदर व्यवस्थाएं सुधरती नहीं है तो वे पलायन करने पर मजबूर होंगे। अब बुखार से मरने वालों की संख्या 36 पहुंच गई है। नटवलग्रंट में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार को 87 मरीजों को दवाएं वितरित कीं।
सफाई कर्मचारियों को दौड़ाया
नटवलग्रंट में गंदगी फैली हुई है। सबसे अधिक यही गांव बुखार की चपेट में है। सोमवार को सफाई कर्मचारियों की टीम जैसे ही गांव पहुंची। ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर टीम को दौड़ा लिया। ग्रामीणों का कहना है अगर पहले से ही साफ सफाई हो जाती तो आज यह दिन न देखने को पड़ता।
सब कह रहे पानी दूषित, पर पहुंचा कोई नहीं पाया
इन मौतों के पीछे सीएमओ डॉ. आरके नैय्यर का कहना है कि प्रभावित गांवों में पानी बहुत दूषित हो चुका है। इसकी जानकारी डीएम से लेकर एसडीएम को दी जा चुकी है। गांव वालों को सलाह दी गई है कि वह उबला हुआ पानी पिएं। साथ ही डीएम से अनुरोध किया गया है कि इन गांवों में पानी के टैंकर भेजवाए जाएं।
लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी गांव में पानी के टैंकर नहीं पहुंच सके हैं। ग्रामीण मजबूरी में हैंडपंपों का पानी पी रहे हैं। वहीं एसडीएम, डीपीआरओ भी कई बार जा चुके हैं लेकिन इन अफसरों के दौरे भी हवाहवाई हो रहे हैं। पानी के टैंकर की जब बात आती है वह एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बचने का प्रयास कर रहे हैं।
गांवों के बीच से निकल रहा चीनी मिल का नाला
नटवलग्रंट व सैदापुर में पांच हैंडपंपों का पानी दूषित मिला था। जिस पर इनको रिबोर करा दिया गया है। किसी भी हैंडपंप के पानी में आर्सेनिक नहीं मिला है। गांवों में साफ सफाई व छिड़काव करा दिया गया है। रामगढ़ चीनी मिल का नाला इन गांवों के बीच से निकलता है। इसी वजह से पानी दूषित होने की संभावना है।
-तुलसीराम, डीपीआरओ
डीएम का न जाना भी बेेहद चौंकाने वाला रहा
गोंदलामऊ विकासखंड में 36 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 15 दिन के अंदर रोजाना कोई न कोई मौत हो रही है। इतनी बढ़ी समस्या होने के बावजूद डीएम शीतल वर्मा ने एक बार भी गांवों की हकीकत नहीं देखी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब डीएम ही मौतों से इत्तेफाक नहीं रखती हैं तो अन्य अफसर कैसे रखेंगे। एक बार भी डीएम गांव आ गई होतीं तो शायद कुछ व्यवस्थाएं सुधर जातीं।