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कोच ही नहीं तो कैसे करें प्रैक्टिस

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सीतापुर। जिले में खेल का ढांचा पूरी तरह से बेपटरी है। इसी वजह से खेल प्रतिभाएं निखर कर सामने नहीं आ पा रही हैं। यहां पर कई महत्वपूर्ण खेलों के कोच ही नहीं हैं, ऐसे में खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। वहीं, जिन खेलों के कोच हैं, उनके खिलाड़ी आते तो हैं, लेकिन उनको सरकारी स्तर से किट तक की सुविधा नहीं मिलती है। अगर कोचिंग लेनी है तो आपको किट लानी होगी। तभी आप प्रैक्टिस कर सकते हैं।
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जिले में मेजर ध्यानचंद स्टेडियम, तरणताल व महमूदाबाद में सरकारी स्टेडियम है। यहां पर स्वीमिंग, बैंडमिंटन, हॉकी व टेबल टेनिस के कोच नहीं हैं। ऐसे मेें जब इन खेलों के खिलाड़ी मैदान पर जाते हैं तो उनको गुरु का मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है। इससे वह बिना टिप्स के ही खुद प्रैक्टिस करते रहते हैं।

इसके अलावा फुटबाल, ताइक्वांडो व कबड्डी के कोच तो हैं, लेकिन खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से किट की सुविधा नहीं मिलती है। ऐसे में खिलाड़ी अपने साथ किट लेकर आते हैं। अगर वह किट न लाएं तो प्रैक्टिस से बाहर हो जाते हैं। इन अव्यवस्थाओं के चलते जिले में खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं।
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कहने को तो जिले में तीन स्टेडियम हैं, लेकिन यहां पर सुविधाओं का अकाल है। जिस तरह खिलाड़ी को सुविधा की जरूरत होती है ,वह यहां पर एक भी नहीं हैं। यह हालात कई वर्षों से बने हुए हैं। कई बार व्यवस्थाएं सुधारने की कवायद शुरू हुई, लेकिन यह अंजाम तक नहीं पहुंच सकी।

60 रुपये है सालाना फीस
इन स्टेडियम में अगर किसी को कोच के मागदर्शन में प्रेक्टिस करनी होती है तो इसके लिए खेल विभाग द्वारा रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। इसकी फीस महज 60 रुपये सालाना है। इस फीस को एक बार जमा करके पूरे साल प्रेक्टिस कर सकते है। वही अगर यही प्रेक्टिस बाहर करनी पड़ी तो कोच करीब 500 रुपये प्रतिमाह लेते है। कोचिंग तो सस्ती है पर सुविधाएं नहीं है।

पूरे प्रदेश के हैं हालात
जिन खेलों के कोच नहीं है यह हालात सीतापुर के नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के है। शासन स्तर से मिलने वाली सभी सुविधाएं खिलाड़ी को दी जाती है। किट सरकारी स्तर से नहीं आती है।
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नरेश यादव, जिला क्रीडा अधिकारी
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