2300 शिक्षकों के जाने से विभाग को छूट रहा पसीना
सीतापुर। वित्तविहीन शिक्षकों के बोर्ड परीक्षा बहिष्कार से परीक्षा पर संकट के बादल मंडराने लगे है। कारण यह है परीक्षा कराने में सबसे अधिक तादाद इन शिक्षकों की होती है। इस बार करीब 2300 शिक्षकों को कक्ष निरीक्षक के रुप में लगाया गया है।
अब जब बहिष्कार का एलान कर दिया तो विभाग के हाथ पांव फूल गए। डीआईओएस ने तत्काल अति महत्वपूर्ण पत्र लिखते हुए शासन को अवगत करा दिया है। छह फरवरी से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू हो रही है।
इसको कराने में करीब 3500 कक्ष निरीक्षक लगाए गए हैं। इसमें करीब 2300 कक्ष निरीक्षक वित्तविहीन कॉलेजों के शामिल हैं। वहीं खुद के सरकारी माध्यमिक कॉलेजों के केवल 700 ही शिक्षक है। बाकी उधारी के बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षक है।
जब वित्तविहीन शिक्षकों ने मानदेय देने सहित अन्य मांगों को लेकर बोर्ड परीक्षा व मूल्यांकन का बहिष्कार कर दिया है तो माध्यमिक शिक्षा विभाग हैरत में पड़ गया है। आखिर इतनी तादाद में कहां से शिक्षक आएंगे। बिना इन शिक्षकों के सहयोग के परीक्षा कराना संभव नहीं है। ऐसे में डीआईओएस ने शासन को महत्वपूर्ण पत्र लिखते हुए पूरी समस्या से अवगत करा दिया है।
बेसिक भी नहीं देगा इतने शिक्षक
अगर मान लिया जाए सरकार वित्तविहीन शिक्षक को मनाने में नाकामयाब रहती है तो ऐसे में विकल्प बचता है कि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों का सहयोग लिया जाए। लेकिन यह विकल्प भी कारगर नहीं होगा। क्योंकि इसके लिए करीब तीन हजार बेसिक शिक्षकों की जरुरत पड़ेगी।
इतनी तादाद में एक साथ शिक्षक जाने से सैकड़ों प्राथमिक स्कूल बंद होने लगेंगे। जबकि इन विद्यालयों में भी मार्च में परीक्षा होगी। ऐसे में बेसिक विभाग एक साथ इतने टीचर कदापि नहीं देगा। ऐसे में विकल्प बचेगा कि वह वित्तविहीन शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करें।
क्या है बहिष्कार के प्रमुख कारण
प्रदेश सरकार द्वारा अकारण ही मानदेय बंद कर देना।
वित्तविहीन शिक्षक/कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा युक्त नियमावली आश्वासन के बाद भी न बनाना।
माध्यमिक शिक्षा में 87 प्रतिशत से अधिक योगदान देने वाले वित्तविहीन कॉलेजों के साथ सौतेला व्यवहार करना।
केंद्र निर्धारण में समानता के अधिकार का हनन करना, तीसरे पायदान पर वित्तविहीन कॉलेजों को रखना।
परीक्षा का पारिश्रमिक शुल्क 36 रुपये से अधिक न बढ़ाना।
बोर्ड परीक्षा में सरकार द्वारा वित्तविहीन कॉलेजों के प्रति तानाशाही रवैया अपनाना।
जब मानें शिक्षक, तभी बने बात
जब तक वित्तविहीन शिक्षक/कर्मचारियों का मानदेय बहाल व अन्य मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तब तक परीक्षा व मूल्यांकन का बहिष्कार जारी रहेगा। प्रदेश सरकार हम लोगों को जब शिक्षक मानेगी तभी हम परीक्षा में सहयोग करने को तैयार होंगे। अब हम लोग उधारी का फर्नीचर भी नहीं देंगे।
-पंकज पांडेय, जिलाध्यक्ष, माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा
शासन को करा दिया अवगत
वित्तविहीन शिक्षकों के परीक्षा व मूल्यांकन के बहिष्कार को लेकर तत्काल शासन को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है। वहां से निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-देवकी सिंह, डीआईओएस