फ्लैग-स्वाइन फ्लू : अलर्ट मोड पर अस्पताल व स्कूल
स्कूल-कॉलेजों में प्रार्थना सभा पर लगी रोक
प्रमुख सचिव चिकित्सा ने अफसरों को भेजे निर्देश
जिला अस्पताल में बनेगा अलग आइसोलेटेड वार्ड
संदिग्ध मरीज की जांच 24 घंटे में की जाए जांच
सीतापुर। शासन ने स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया है। सेहत महकमे को इसकी रोकथाम और बचाव के जरूरी कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं। इसी के साथ स्कूल-कॉलेजों में प्रार्थना सभा पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा प्रशांत त्रिवेदी ने सभी अस्पतालों को दिए निर्देश में कहा है कि स्वाइन फ्लू के रोगियों के लिए अलग से आइसोलेटेड वार्ड बनाए जाएं ।
भेजे गए पत्र में प्रमुख सचिव ने स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज की जांच 24 घंटे में पूरी करने तथा टैमी फ्लू का पर्याप्त स्टाक रखने के निर्देश दिए हैं। पत्र में स्वाइन फ्लू रोगियों के उपचार एवं रोकथाम में लगे अफसर व कर्मियों का टीकाकरण कराने की बात भी कही गई है। उन्होंने इससे बचाव का लिए जिले के सभी स्कूल-कॉलेजों को भी सतर्कता बरतते हुए प्रार्थना सभा पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कहा गया है कि ज्यादा संख्या में बच्चों को एक ही स्थान पर एकत्र न होने दिया जाए। यदि किसी भी छात्र या स्टाफ में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो डॉक्टरी इलाज की सलाह दी जाए। उसे कम से कम सात दिन की छुट्टी पर भेजा जाए। स्कूल प्रबंधन बच्चों के अभिभावकों को चिकित्सा प्रमाण पत्र देने को बाध्य न करें। उन्होंने नगर पालिका व पंचायतों को सुअर बाड़े आबादी से दूर स्थापित कराने के निर्देश दिए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक देवकी सिंह ने बताया कि सभी प्रधानाचार्यों को शासन की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जिले में स्वाइन फ्लू का कोई रोगी नहीं मिला है। दवाओं का पर्याप्त स्टॉक है। सभी अस्पतालों में दवाएं भेजी जा रही हैं। शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए सर्तकता बरती जा रही है।
-डॉ. ध्रुवराज सिंह, सीएमओ
क्या है स्वाइन फ्लू
यह सांस से जुड़ी बीमारी है, जो वायरस एच1 एन1 से होती है। 2009 और 2010 में जो स्वाइन फ्लू हुआ था। उसके मुकाबले वायरस का स्ट्रेन थोड़ा वीक हुआ है। हालांकि इस वायरस में हर एक-दो साल में स्ट्रेन चेंज हो जाता है।
कैसे फैलता है
खांसने या छींकते वक्त हवा या जमीन पर मुंह और नाक से छोटे-छोटे कण गिरते हैं। इनमें स्वाइन फ्लू के वायरस होते हैं। यह कण हवा में फैलने या छूने की वजह से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक से चले जाते हैं। इससे दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हो जाता है। इस तरह वायरस फैलता रहता है।
स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण
-नाक बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
-मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना।
-सिर में भयानक दर्द होना।
-सर्दी होना और लगातार खांसी आना।
-दिनभर नींद आनाए बहुत थकान महसूस होना।
-बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार बढ़ना।
-गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ना।
यह बरतें सावधानी
-जब भी खांसी या छींक आए तो रूमाल या टिशू पेपर का इस्तेमाल करें।
-थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें।
-लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें।
-फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
-अगर फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से 1 मीटर की दूरी पर रहें।