84 कोसी होली परिक्रमा सोमवार भोर को नैमिषारण्य से कूच करेगी। हालांकि अभी तक पड़ाव स्थल तैयार नहीं हो सके हैं। न तो परिक्रमा मार्ग दुरुस्त हो पाए हैं और न ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकी हैं। ऐसे में परिक्रमा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ठोकरे खाते हुए ही आगे बढ़ना पड़ेगा।
पड़ाव स्थल अतिक्रमण का शिकार होने की वजह से श्रद्धालुओं को ठहरने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। सोमवार भोर 84 कोसी परिक्रमा यात्रा नैमिषारण्य में डंका बजने के साथ अपने पहले पड़ाव कोरौना के लिए कूच करेगी, इस दौरान नैमिषारण्य से निकलते ही अतिक्रमण की वजह से श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
कोरौना पहुंचने पर भी दिक्कत कम नहीं होगी। यहां पड़ाव स्थल को अभी तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है। जिस ऐतिहासिक बराह कूप को लेकर इस पड़ाव को जाना जाता है, श्रद्धालु इस बराह कूप के भी दर्शन आसानी से नहीं कर सकेंगे। बराह कूप पूरी तरह से अतिक्रमण का शिकार है।
यह कूप खेतों के बीच समा गया है, जहां पर पहुंचना बेहद मुश्किल होगा। श्रद्धालु यहां से गुजरेंगे, जरूर, लेकिन बराह कूप तक नहीं पहुंच सकेंगे। बनगढ़ आश्रम के महंत संतोष दास कहते हैं कि पौराणिक बराह कूप को अतिक्रमण मुक्त न कराकर जिम्मेदार अधिकारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
हालांकि इस बार तीर्थ के जल की सफाई करा दी गई है। इस बार श्रद्धालु इस तीर्थ में स्नान व ध्यान कर सकेंगे। पड़ाव से आगे बढ़ने पर पथरीले मार्ग परेशान कर सकते हैं। कोरौना से रामगढ़ तो इस कदर नुकीले पत्थर बिखरे हैं, कि जो लोगों को चोटिल कर सकते हैं।
साधु संत व आम श्रद्धालु 84 कोसी परिक्रमा की परंपरा टूटने से नाराज हैं। साधु-संतों का कहना है कि हर बार परिक्रमा का शुभारंभ होने से पहले प्रशासन साधु संतों व आम नागरिकों के साथ मिश्रिख तहसील में बैठक करता था। यह परिक्रमा महार्षि दधीचि के पदचिह्नों पर चलना माना जाता है।
ऐसे में इस बार परिक्रमा की रूपरेखा मिश्रिख के बजाय नैमिषारण्य में बैठक कर तय की गई है। साधु व संतों का कहना है कि मिश्रिख में बैठक न करना, परंपरा तोड़ने जैसा कदम है। श्रद्धालुओं का यहां तक कहना है कि बैठक की कोई पूर्व सूचना नहीं थी, अचानक बैठक की गई और उसमें आम श्रद्धालुओं को नहीं बुलाया गया। मिश्रिख। महार्षि दधीचि की यह नगरी 84 कोसी परिक्रमा का 11 पड़ाव है।
यहां पर 84 कोसी परिक्रमा तो संपन्न हो जाती है। वहीं पंच कोसी परिक्रमा शुरू होती है। 84 कोसी परिक्रमा के यहां पहुंचने पर मेला शुरू हो जाता है। इस मेले में करीब 5 लाख की संख्या में श्रद्धालु मिश्रिख पहुंचता है। हालत ये है कि न तो श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए उतना स्थान बचा है और न ही पंच कोसी परिक्रमा मार्ग को दुरुस्त किया गया है।
एक अनुमान के हिसाब से नैमिषारण्य से शुरू होने वाली 84 कोसी परिक्रमा में 3 से 4 लाख की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। परिक्रमा ज्यों ज्यों आगे बढ़ती है, श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा ही होता रहता है। यह परिक्रमा जब मिश्रिख पहुंचती है, तब श्रद्धालुओं की संख्या 5 लाख तक पहुंच जाती है। इस परिक्रमा में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। नेपाल, भूटान के अलावा कई अन्य देशों से भी श्रद्धालु यहां आते रहते हैं।