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केंद्र बनने को 150 कॉलेजों ने वेबसाइड पर दी गलत जानकारी

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कक्ष में लगवाया एक कैमरा, कॉलम में भर रहे दो, वह भी वॉयस रिकार्डिंग के साथ
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सीतापुर। बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने के लिए माध्यमिक कॉलेज शासन को भी गुमराह कर रहे हैं। स्कूल में लगवाया एक कैमरा पर जानकारी भर दी आमने-सामने दो कैमरे की। वह भी वॉयस रिकार्डिंग के साथ। डीआईओएस ने इसकी जांच कराई। जिसमें कॉलेजों का यह घालमेल खुलकर सामने आया हैं।

इससे कॉलेजों में हड़कंप मचा है। अगर वह यह गलती पांच दिन के अंदर दुरुस्त नहीं करते हैं तो उनको केंद्र बनने की रेस से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के लिए केंद्र बनने की प्रक्रिया चल रही है।
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अगस्त माह में शासन ने सभी कॉलेजों से अपने यहां मौजूद सुविधाओं को परिषद की वेबसाइट पर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इस पर जिले के 375 हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों ने जानकारी अपडेट की थी। इसमें सीसीटीवी कैमरा लगे होने की जानकारी अनिवार्य शर्त थी।

अगर किसी कॉलेज में कैमरे नहीं लगे हैं तो वह केंद्र नहीं बन सकते हैं। इस बार यह भी शर्त थी कि प्रत्येक कक्ष में आमने-सामने दो कैमरे वह भी वॉयस रिकार्डिंग के साथ लगे होंगे। तभी यह जानकारी पूर्ण मानी जाएगी। बिना आमने-सामने कैमरे के केंद्र नहीं बन सकता है।

इस पर जिले के करीब 150 कॉलेजों ने वेबसाइट पर गलत जानकारी भर दी है। उन्होंने दोनों कैमरा लगे होने की बात कही। जब डीआईओएस ने इसकी जांच कराई तो पता चला कि अधिकांश कॉलेजों में केवल एक ही कैमरा लगा है। वह भी वॉयस रिकार्डिंग वाला नहीं है।

इससे जो कॉलेज शासन को गुमराह करके परीक्षा केंद्र बनने का प्रयास कर रहे हैं उनकी मंशा कॉलेज में विद्यार्थियों को अनुचित तरीके से नकल कराना प्रतीत हो रही है। इन कॉलेजों को दोबारा गलती सुधारने का मौका दिया गया है।

ऐसे कॉलेज पांच सितंबर से पहले डीआईओएस को कॉलेज की वास्तविकता की जानकारी उपलब्ध करा दें। उसके बाद डीआईओएस फिर से इसकी जांच कराएंगे। इस जांच के बाद ही उनकी जानकारी अपडेट की जाएगी। तभी वह केंद्र बन सकते है। वरना उनकी दावेदारी निरस्त कर दी जाएगी।
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जल्द सही करें जानकारी
पांच सितंबर से पहले गलत जानकारी भरने वाले कॉलेज एक फॉर्मेट पर सही जानकारी भरकर अवगत करा दें। ताकि उनकी यह जानकारी अपडेट की जा सके। बिना सीसीटीवी वॉयस रिकार्डिंग कैमरा के कोई भी कॉलेज केंद्र नहीं बन पाएगा।
-नरेंद्र शर्मा, डीआईओएस
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